जमशेदपुर : जमशेदपुर में अवैध तरीके से बनाये गये बिल्डिंग को लेकर की जा रही कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को इस मामले की सुनवाई की. इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की अदालत में हुई. इसमें याचिकाकर्ता तौसीफ अली, राजेश चौधरी और जवाहर विग के अलग अलग दर्ज केस की एक साथ सुनवाई हुई. इस केस में झारखंड सरकार, जमशेदपुर के उपायुक्त, एसडीओ और जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी और झारखंड हाईकोर्ट में बिल्डिंग के मसले पर केस दर्ज करने वाले याचिकाकर्ता राकेश झा को पार्टी बनाया गया है. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डीएस नायडू, महेंद्र सिंह, जमशेदपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश झा, आरके ओझा समेत अन्य अधिवक्ता हाजिर हुए. इन लोगों ने कोर्ट को बताया कि यह एकतरफा फैसला हाईकोर्ट ने सुनाया है, जिसमें बिल्डिंग के हिस्सों को तोड़ने का आदेश दिया गया है. (नीचे भी पढ़ें)
इसके साथ ही सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने दलील दी कि 2016 में इसी तरह का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था, जिसमें यह कहा गया था कि बिल्डिंग के हिस्से को तोड़ना अंतिम विकल्प होना चाहिए, पहला विकल्प नहीं. ऐसे हालात में दूसरे विकल्पों पर विचार किये बगैर सीधे तोड़ने का आदेश दे दिया गया है, इस कारण इस कार्रवाई को रोकी जाये. इस पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने तत्काल 14 जनवरी 2026 को 24 बिल्डिंग के हिस्सों को तोड़ने के लिए दिये गये आदेश पर रोक लगा दी और चार सप्ताह में राज्य सरकार, जमशेदपुर के उपायुक्त, एसडीओ और जमशेदपुर अक्षेस के अलावा शिकायतकर्ता राकेश झा को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया. (नीचे भी पढ़ें)
इसके बाद फिर से मामले की सुनवाई होगी. इस फैसले से बिल्डिंग के मालिकों को बड़ी राहत मिली है. वहीं, हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता राकेश झा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ तीन लोग जवाहरविग (बिष्टुपुर के जे रोड स्थित शौर्या इन के मालिक), तौसीफ अली (साकची एसएनपी एरिया के बिल्डिंग संख्या 101 के मालिक) और राजेश चौधरी (साकची एसएनपी एरिया बिल्डिंग संख्या 96 के मालिक) की याचिका पर स्टे दिया गया है. यह सिर्फ तीन मामले में स्टे दिया गया है, पूरे मामले में स्टे नहीं दिया गया है. हालांकि, अधिवक्ता प्रकाश झा ने बताया कि झारखंड हाईकोर्ट की ओर से दिये गये 14 जनवरी 2026 के आदेश पर ही रोक लग चुकी है. इस सुनवाई में तीन लोग जरूर थे, लेकिन सारे लोगों की अलग अलग याचिका दायर है. ऐसे में एक आदेश पर ही रोक लग गयी तो कार्रवाई को ही रोकने का आदेश दे दिया गया है.








