गालूडीह : दीपावली से ठीक पहले हो रही बारिश ने गालूडीह क्षेत्र के कुम्हारों की चिंता बढ़ा दी है. बड़बिल और बिरहिगोड़ा गांव में कुम्हार मिट्टी के दीये और अन्य बर्तन तैयार करने में जुटे हैं, लेकिन लगातार बारिश के कारण उनके कामकाज पर असर पड़ रहा है. दीयों को सुखाने और बाजार तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है. ऐसे में त्योहार के दौरान अच्छी बिक्री की उम्मीद लगाए कुम्हारों को आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है.बारिश ने बढ़ाई दीये सुखाने की मुश्किल : कुम्हारों के लिए दीपावली साल के प्रमुख कमाई वाले अवसरों में से एक है. त्योहार को देखते हुए वे कई दिनों से दीये बनाने में लगे हैं. लेकिन बारिश के कारण मिट्टी के दीयों को समय पर सुखाना मुश्किल हो रहा है. मौसम साफ नहीं रहने पर दीयों को पकाने और बाजार में बिक्री के लिए तैयार करने में भी परेशानी हो सकती है. दीपावली नजदीक होने के कारण कुम्हारों के पास काम पूरा करने के लिए समय भी कम बचा है. (नीचे भी पढ़ें)
18 ग्रामीण इलेक्ट्रॉनिक चाक से बना रहे बर्तन : बड़बिल गांव में करीब 18 ग्रामीण इलेक्ट्रॉनिक चाक की मदद से मिट्टी के बर्तन तैयार कर रहे हैं. सरकार की ओर से सरायकेला-खरसावां में प्रशिक्षण देने के बाद उन्हें इलेक्ट्रॉनिक चाक उपलब्ध कराया गया था. इससे बर्तन बनाने में सहूलियत हुई है. हालांकि, गांव के कुछ कुम्हार अब भी पारंपरिक चाक का इस्तेमाल करते हैं. दीपावली को लेकर दीये के साथ मिट्टी के अन्य बर्तन बनाने का काम भी जारी है. (नीचे भी पढ़ें)
बिजली की झालरों ने बढ़ाई चुनौती : कुम्हारों का कहना है कि पहले दीपावली में मिट्टी के दीयों की अच्छी मांग रहती थी. अब बिजली की झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों के बढ़ते चलन से दीयों की बिक्री प्रभावित हो रही है. घटती मांग और कम कमाई के कारण नई पीढ़ी भी पुश्तैनी कारोबार अपनाने से दूरी बना रही है. कुम्हारों के सामने एक ओर बदलती बाजार की पसंद चुनौती बनी हुई है, तो दूसरी ओर बेमौसम बारिश ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है. ऐसे में पारंपरिक मिट्टी कला को बचाए रखना भी मुश्किल होता जा रहा है.












