जमशेदपुर: झारखंड के छात्र संगठन ‘सोशल स्पार्क्स’ ने दिहाड़ी मजदूरों, सड़क किनारे सामान बेचने वालों और छोटे विक्रेताओं की मदद के लिए स्थानीय बाजारों में एक विशेष सामुदायिक मुहिम चलाई. छात्रों की इस पहल ने “वोकल फॉर लोकल” अभियान को जोर-शोर से आगे बढ़ाया. उन्होंने जमशेदपुर के निवासियों से अपील की कि वे हाथ से बने दीये, पूजा-पाठ का पारंपरिक सामान और सजावट की चीजें सीधे सड़क किनारे बैठे विक्रेताओं से खरीदें, ताकि उन्हें अपनी आजीविका के लिए उचित मुनाफा मिल सके.(नीचे भी पढ़े)

इस मुहिम के दौरान, छात्र स्वयंसेवकों ने खुद सड़क किनारे बैठे विक्रेताओं के पास जाकर उनसे दीये, सजावट के सामान और पूजा सामग्री की खरीदी की. इस प्रत्यक्ष प्रयास के जरिए, स्वयंसेवकों ने समाज के सामने एक मिसाल पेश की, ताकि आम लोग बड़े शोरूम, मॉल या कॉर्पोरेट कंपनियों के बजाय सड़क किनारे बैठे स्थानीय विक्रेताओं से खरीदारी करने के लिए प्रेरित हों. इस पहल में दर्शन मूनका (सह-संस्थापक), नित्या अग्रवाल (सहायक कोषाध्यक्ष), मिशा, राजवीर और आध्या शामिल थे. (नीचे भी पढ़े)

सड़क किनारे सामान बेचने वालों के लिए, रोजमर्रा की ये छोटी-छोटी बिक्री उनकी आजीविका चलाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है. बड़ी रिटेल चेन के बजाय उनसे खरीदारी करने से उनके जीवन-यापन पर सीधा सकारात्मक असर पड़ता है.’सोशल स्पार्क्स’ ने जमशेदपुर के नागरिकों से अपील की है कि वे इन छुट्टियों के दौरान भी स्थानीय सड़क-विक्रेताओं से ही खरीदारी करने का आग्रह भी किया. आने वाले दिनों में भी खरीदारी करने की अपील की.












