
जमशेदपुर : टाटा मोटर्स का जमशेदपुर प्लांट काफी मंदी के दौर से गुजर रहा है. वैसे अप्रैल से बीएस-6 गाड़ियों को ही मान्यता होगी, जिसके बाद हालात सुधरने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन कोरोना वायरस के अटैक के बाद एक बार फिर से कारोबार पूरी तरह ठप है. इस कड़ी में टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट ने एक बार फिर से 18 व 19 मार्च को ब्लॉक क्लोजर लिया है. 18 मार्च बुधवार और 19 मार्च यानी गुरुवार को ब्लॉक क्लोजर होगा. इसके बदले कर्मचारियों को आधा दिन का वेतन समेत अन्य सुविधाएं दी जायेगी. वैसे कारोबार के लिहाज से अभी का मौसम ही सबसे बेहतर माना जाता है. मानसून आने के वक्त तक कारोबार बेहतर रहता है, जिसके बाद बारिश के मौसम में सुस्ती आ जाती है. इसको देखते हुए टाटा मोटर्स हो या फिर अन्य सारे प्लांट, हर कोई चाहता है कि इस मौसम में बेहतर कारोबार किया जाये, लेकिन आर्थिक मंदी की हालत के बाद कोरोना अटैक और ऊपर से बीएस-4 गाड़ियों को बंद कर बीएस-6 गाड़ियों के शुरू होने के चेंजओवर के कारण भी मंदी की स्थिति काफी ज्यादा है.
फरवरी व मार्च में अब तक आठवां क्लोजर का सरकुलर, कर्मचारियों को नुकसान
टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट में फरवरी माह और मार्च माह में आठवां क्लोजर का सरकुलर निकाला गया है. इससे पहले 14 और 15 फरवरी को ब्लॉक क्लोजर लिया गया था. इसके तुरंत बाद 26 और 29 फरवरी को भी ब्लॉक क्लोजर लिया गया था. इससे पहले 12 और 13 मार्च को भी ब्लॉक क्लोजर ही था. अब एक बार फिर से 18 और 19 मार्च को ब्लॉक क्लोजर लिया गया है. कंपनी की ओर से पहले यूनियन के साथ हुए समझौता का हवाला देते हुए कर्मचारियों को आधा दिन का वेतन दिया जाता है और आधा नहीं दिया जाता है. वैसे लगातार होने वाले ब्लॉक क्लोजर से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इसको लेकर कर्मचारी भी दहशत में है. पहले से ही बाइ-सिक्स समेत तमाम अस्थायी कर्मचारियों को हटाया जा चुका है, जिनको बाद में काम शुरू होने पर बुलाने की बात कहीं गयी है. अब लगातार ब्लॉक क्लोजर होने से स्थायी कर्मचारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
अप्रैल से हालात सुधरने की उम्मीद, कोरोना वायरस पर रहेगी नजर
अप्रैल माह से हालात सुधरने की उम्मीद है क्योंकि बीएस 4 की जगह अब बीएस 6 गाड़ियों को ही मान्यता होगी. ऐसे में नयी गाड़ियों की खरीद शुरू होगी. वैसे कोरोना वायरस के कारण जिंदगी थम सी गयी है. इससे ऑटोमोबाइल सेक्टर में ही सबसे ज्यादा कमी है. वित्तीय वर्ष 2019-2020 के अंतिम माह में फाइनांसियल रिजल्ट का भी समय है, जिस कारण कारोबार काफी धीमा ही चल रहा है. वैसे भी पहले से ही सेंसेक्स में हो रही गिरावट से यह सामने आ चुका है कि कारोबारी माहौल ठीक नहीं है.













