
जमशेदपुर : अब तक वैष्विक महामारी के दौर में झारखंड की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली लौहनगरी जमशेदपुर अछूता है. भले पूरे विश्व के साथ देश के कई बड़े शहर और राज्य कोरोना के संक्रमण से तबाह हो चुका है, लेकिन ईश्वर का लाख-लाख शुक्र है कि जमशेदपुर अभी इससे इस वैश्विक महामारी से दूर है. और यही कारण है कि जमशेदपुर ग्रीन जोन की सूची में है, लेकिन सावधान एक ऐसा शत्रु जमशेदपुर के बीचो- बीच बैठा है, जिसे कोरोना का सबसे बड़ा वाहक माना जा रहा है है. उस शत्रु का नाम है चमगादड़. जी हां विश्व की तमाम संस्थाओं का दावा है कि चीन बुहान शहर में चमगादड़ों पर कोरोनवायरस का परीक्षण कर रहा था जिसका नतीजा आज पूरा विश्व भुगत रहा है. वैसे चमगादड़ अभी खौफ का दूसरा नाम बन चुका है.

वहीं जमशेदपुर जिला मुख्यालय के ठीक पीछे झारखंड का सबसे खूबसूरत पार्क जुबिली पार्क स्थित है, जिसका रखरखाव टाटा स्टील करती है. और इसी जुबिली पार्क के बीचोंबीच स्थित जयंती सरोवर के टापू पर स्थित जंगल में लाखों की संख्या में वैश्विक महामारी कोरोना के कथित यमदूतों यानी चमगादड़ों का जमावड़ा है. वैसे यह जमावड़ा केवल आज का नहीं है इस जंगल में चमगादड़ सालों भर रहते हैं और आम दिनों में इस टापू पर सैलानी लुफ्त उठाने पहुंचते हैं. लेकिन वर्तमान परिस्थियों में वैश्विक जांच एजेंसियों के दावों के बाद जुबिली पार्क के जयंती सरोवर स्थित बैट पार्क अब डरावना लगने लगा है. वैसे जमशेदपुर शहर जाने अनजाने में यमदूतों के काफी करीब है. भले अबतक यह शहर कोरोना के संक्रमण से अछूता है, लेकिन इन यमदूतों को देखकर आसानी से आनेवाले खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि चमगादड़ अपने क्षेत्र से बाहर विचरण नहीं करते हैं, और सभी चमगादड़ संक्रमित भी नहीं होते हैं, इसलिए इससे ज्यादा आतंकित होने की जरूरत नहीं. इस बारे में जिले के पदाधिकारियों द्वारा कोई भी अधिकारिक बयान देने से इनकार किया गया है.















