
सरायकेला : भले पूरा विश्व कोरोना संकट से जूझ रहा है. सरायभले झारखंड में कोरोना संक्रमितों की संख्या में हर दिन हर दिन वृद्धि हो रही है, लेकिन बालू माफियाओं को इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. जहां बालू माफिया बेरोकटोक धड़ल्ले से जुगाड़ टेक्नोलॉजी से बालू का खनन और सरकारी जमीन पर भंडारण करने में जुटे हुए हैं. एक तरफ राज्य सरकार और जिला प्रशासन कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने को लेकर दिन रात जरूरी कदम उठाने में व्यस्त है, तो दूसरी तरफ बालू माफिया लॉकडाउन के अनुपालन कराने में व्यस्त प्रशासन की गैरमौजूदगी में धड़ल्ले से अवैध बालू का खनन और भंडारण करने में जुटे हैं. वैसे ये काम इनके द्वारा चोरी- छिपे या रात के अंधेरे में नहीं बल्कि दिन के उजाले में किया जा रहा है. वैसे पूरा मामला जांच का है, कि आखिर ये बालू खनन और भंडारण किस के इशारे पर चल रहा है. इसमें खनन विभाग और स्थानीय पुलिस- प्रशासन की क्या भूमिका है.

वैसे यह नजारा सरायकेला- खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना अन्तर्गत सापड़ा नदी घाट का है. जहां स्वर्णरेखा नदी तट से बालू माफिया बेरोकटोक बालू की निकासी कर वन भूमि पर भंडारण कर रहे हैं. वैसे इस घाट से बालू माफिया स्थानीय मजदूरों से नदी के बीच से पहले एक टापूनुमा स्थल पर बालू का ढेर लगवाते हैं उसके बाद ट्रैक्टर से ही पास के वनभूमि में भंडारण कर रात के अंधेरे में उन बालुओं को गन्तव्य तक पहुंचा रहे हैं. हालाकि सरकार के स्तर से बालू खनन को लेकर कुछ जरूरी रियायतें दिए जाने का निर्देश जारी किए जाने की खबरें मीडिया के माध्यम से सामने आयी है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर लॉकडाउन के कारण लाखों नौकरियां गवाह चुके कामगारों के बच्चों की पढ़ाई के मामले में अब तक सरकार का आदेश स्थानीय जिला प्रशासन एवं निजी स्कूलों तक नहीं पहुंचा है, लेकिन बालू खनन का निर्देश खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन के साथ बालू माफियाओं तक जरूर पहुंच गया है.















