
जमशेदपुर : 8 मई को पूरी दुनिया विश्व रेड क्रॉस दिवस के रूप में मनाती है, यह दिन रेड क्रॉस सोसाईटी को समर्पित है जिसने पूरी दुनिया में एक नयी क्रान्ति का सूत्रपात किया, जिसने बताया कि मानवता क्या है और जिसने मानवता, स्वतंत्रता, निष्पक्षता, स्वंयसेवा की भावना, एकता तथा वैश्विकता को सामने रखकर एक तीसरी शान्तिरुपी शक्ति का परचम लहराया. रेड क्रॉस सोसाईटी की स्थापना विश्व इतिहास में एक बड़ी घटना थी. इस सोसाइटी की स्थापना के साथ ही पूरे विश्व में एक नयी शक्ति का उदय हुआ, जो किसी भी दो देशों के युद्ध में एक तीसरी निष्पक्ष शक्ति के रूप में सामने आयी, जो युद्ध के मैदान में घायल सैनिकों की सेवा, मृत सैनिकों के अंतिम संस्कार एवं युद्ध बंदियों के मानवीय अधिकारों के प्रति सजग, संकल्पित एवं सेवारत हुई. आज विश्व के 191 देश कहीं एकमत है तो वह है रेड क्रॉस के सिद्धान्त. रेड क्रॉस डे थीम- इंटरनेशनल कमिटी ऑफ रेड क्रॉस तथा इन्टरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस के साथ रेड क्रॉस सोसाईटी ने इस वर्ष रेड क्रॉस दिवस 8 मई 2021 पर बिना रुके आगे बढते रहने का थीम (unstoppable) दिया है जो कि बहुत ही प्रासंगिक है, क्योंकि रेड क्रॉस कार्यकर्ताओं की वास्तविक परिक्षा तो विपरीत परिस्थितियों में ही होती है. इस शहर के लोगों ने तो अपनी आंखों से देखा कि बीते वर्ष कोविड-19 के अन्जाने कहर और लहर के बीच रेड क्रॉस कार्यकर्ताओं ने किस तरह पीड़ित मानवता की सेवा के कार्यों को किया, जहां लोगों को उनकी जरूरत थी, उन झोपड़पट्टियों में कच्चा राशन पहुंचाने से लेकर, गृहविहिन लोगों को खिचड़ी बांटने, प्रशासन की मदद करने, तकनीकी कार्य में, सेनीटाईजर बनाने में, कन्टेन्मेंट जोन में राशन पहुंचाने में, कोविड-19 जांच की मशीन एमजीएम में स्थापित करवाने में, और सबसे महत्वपूर्ण वह रक्तदान, जिसके माध्यम से हजारों लोगों के जीवन को बचाया जा सका, सम्पूर्ण लॉकडाउन की स्थिति में जब सारे रक्तदान शिविर बन्द हो गये थे, रक्तदाता घर से निकल नहीं पा रहे थे, ऐसे समय में रेड क्रॉस सोसाईटी के हौसले से अप्रैल से जून 2020 के बीच 2000 यूनिट रक्त संग्रह हुआ. वह भी बिना रुके. आज 425 यूनिट से अधिक प्लाज्मा दान हमारे बिना रुके आगे चलते रहने की ही कहानी कहता है. रेड क्रॉस सोसाईटी यानि Unstoppable.रेड क्रॉस सोसाईटी, पूर्वी सिंहभूम एक बार पुनः सभी रक्तदाताओं से अनुरोध करती है कि कोरोना ने इस वर्ष फिर से परिस्थितियों को हम सबके खिलाफ किया है, आइये इन विपरीत परिस्थिति का मुकाबला हम रक्तदान के माध्यम से करें, क्योंकि आज सबसे अधिक आवश्यकता रक्त की है, क्योंकि रक्तदान शिविरों का आयोजन बन्द है, रक्तदान करने वाले नही आ पा रहे हैं, ऐसे में एक बार फिर हम सभी आगे आएं.आईये रेड क्रॉस दिवस 8 मई को रेड क्रॉस भवन, साकची, जमशेदपुर में आयोजित इस रक्तदान महोत्सव में अपना योगदान दें, रक्तदान करें. (नीचे पूरी खबर पढ़ें)

रेड क्रॉस पूर्वी सिंहभूम – विश्व स्तरीय रेड क्रॉस सोसाईटी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूर्वी सिंहभूम रेड क्रॉस सोसाईटी है, जो अपने कार्यकर्ताओं, रक्तदाताओं एवं समाज के उदार हृदय वाले लोगों के कारण पूरे देश में एक विशिष्ट पहचान रखता है। रेड क्रॉस सोसाईटी की एक पहचान विश्व में सर्वाधिक ब्लड बैंकों के संचालन एवं रक्तदान जागरुकता को लेकर भी है. रेड क्रॉस सोसाईटी रक्तदान अभियान का पर्याय है। आज रेड क्रॉस के लगभग सभी सक्षम कार्यकर्ता रक्तदान करते हैं, इसी कड़ी में रेड क्रॉस सोसाईटी, पूर्वी सिंहभूम की शाखा रक्तदान अभियान को नियमित रूप से चलाती है। विश्व रेड क्रॉस दिवस के अवसर पर 8 मई 2021 शनिवार को कोविड-19 प्रोटोकोल में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया है ताकि रक्त के जरुरतमंद लोगों को आसानी से रक्त उपलब्ध हो सके। (नीचे पूरी खबर पढ़ें)
विश्व रेड क्रॉस दिवस का इतिहास – 8 मई 1828 को जन्में जीन हेनरी ड्युनेंट के जन्म दिवस को रेड क्रॉस दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज रेड क्रॉस के पूरी दूनिया में 10 करोड़ कार्यकर्ता है जो पीड़ित मानवता की सेवा में जुड़े हैं। पीड़ित मानवता की रक्षा के लिए इस सिद्धान्त का जन्म 1859 में सोल्फेरिनों के युद्ध स्थल में इम्पिरियल आर्मी ऑफ आस्ट्रिया तथा फ्रेन्कों सार्डिनियन एलांयस की सेनाओं के बीच हुए युद्ध के बाद रंक्तरंजित लगभग 40 हजार घायल एवं मृत् सैनिकों की दशा देखकर युवक जीन हेनरी ड्युनेंट के मन में हुआ, जो उस समय अपने व्यापार के सिलसिले में नेपोलियन तृतीय से बातचीत करने हेतु जा रहे थे। युद्ध पश्चात के इस दृश्य को देखकर उन्होने अपना सारा कामकाज भुला दिया और सबसे पहले घायल सैनिकों की सेवा में बिना किसी भेदभाव के लगे और आवाज दे-देकर आस पास के गांव के लोगों को भी घायलों की मदद के लिए प्रेरित किया। घायलों की सेवा के बाद उन्होने युद्ध में वीरगति को प्राप्त सैनिकों के शव के अंतिम संस्कार का निर्णय लिया। इन सारे कार्यों के लिए उन्होने अपने व्यापार के सारे पैसे खर्च डाले। वहां से वापस आने के बाद उनके मन में युद्ध के बाद का वह दृश्य एक बड़ा प्रश्न बनकर सामने खड़ा था, जिसका जवाब उनके पास नहीं था। उन्होने इस घटना को 1862 में एक किताब का रूप दिया और जिसका नाम था ‘ए मेमोरी ऑफ सोल्फेरिनो’ जिस किताब में उन्होने न सिर्फ युद्ध के बाद घायल एवं मृत सैनिकों की स्थिति के सम्बन्ध में लिखा बल्कि दो देशों के लिए लड़ रहे सैनिकों की स्थिति का भी वर्णण किया कि एक सैनिक जो अपने देश के मान सम्मान के लिए लड़ता है, क्या युद्ध स्थल में घायल होने, वीरगति प्राप्त होने या दुश्मन देशों के हांथ पकड़े जाने पर उसके मान सम्मान का कोई ख्याल रखता है। इसी पुस्तक में उन्होने एक ऐसी तीसरी शक्ति के गठन का सुझाव दिया जो कि बिना किसी भेदभाव के निष्पक्षता के साथ युद्ध स्थल के घायल सैनिकों की सेवा कर सके और मृतकों का अंतिम संस्कार और युद्ध बंदियों को उनका मानवीय अधिकार दिला सके। उनके प्रयास से ही 1864 में रेड क्रॉस सोसाईटी की पहली बैठक जेनेवा में आयोजित हुई, जिसे जेनेवा कन्वेंशन के नाम से पूरे विश्व में जाना जाता है। जिन हेनरी ड्युनेंट, जिन्होने अपने प्रयास से विश्व में एक ऐसी संस्था का गठन किया जो आज करोड़ों लोगों की जीवन रेखा है। शान्ति का पहला नोबेल पुरस्कार रेड क्रॉस सोसाईटी के स्थापना के लिए 1901 में जीन हेनरी ड्युनेंट तथा सहयोगी फ्रेडरिक पैसी को संयुक्त रूप से प्राप्त हुआ। (नीचे पूरी खबर पढ़ें)
रक्तदान के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण बातें
रक्तदान का इतिहास
1616 – विलियम हार्वे ने पहली बार यह खोज किया कि किसी भी जीवित जानवर के शरीर में नियमित रक्त का प्रवाह होता है।
1665 – रिचर्ड लोवर ने पहली बार एक कुत्ते का रक्त दूसरे कुत्ते को चढ़ाकर उसकी जान बचायी।
1818 – डॉ. जेम्स ब्लैण्डल ने पहली बार एक मनुष्य का रक्त दूसरे मनुष्य को चढ़ाकर उसकी जीवनरक्षा करने में सफलता पाइ।
1901 – नोबल पुरस्कार विजेता कार्ल लैण्डस्टेनर ने ए बी एवं ओ ब्लड ग्रुपिंग सिस्टम की खोज की।
1936 – विश्व का पहला ब्लड बैंक युद्ध के घायलों के लिए स्पेन के मैड्रिड में स्थापित हुआ
1937 – विश्व का पहला आम लोगों के लिए ब्लड बैंक युनाईडेट स्टेट ऑफ अमेरिका के शिकागों शहर में स्थापित हुआ।
1940 – ब्लड ग्रुप के निगेटिव तथा पॉजीटिव ग्रुप (आरएच फैक्टर) की खोज कार्ल लैण्डस्टेनर तथा डॉ. एलेक्जेंडर ने की।
1942 – भारत में कोलकाता में पहला ब्लड बैंक घायल सैनिकों के लिए स्थापित हुआ।
1945 – कोलकता में स्थापित इस सेन्ट्रल ब्लड बैंक से आम लोगों की जरूरतों को पूरा किया जाने लगा।
रक्तदान कौन कर सकते हैं
18 से 65 वर्ष की आयु का कोई भी इंसान पुरुष अथवा स्त्री।
पुरुष तीन महीने में एक बार तथा स्त्री चार महीने में एक बार रक्तदान कर सकते हैं।
रक्तदाता का शारीरिक वजन कम से कम 45 किलोग्राम होना चाहिए।
रक्तदाता का शरीर में होमोग्लोबिन की मात्रा 12.5 ग्राम प्रतिलीटर होना चाहिए।
रक्तदाता का ब्लड प्रेशर सामान्य होना चाहिए।
रक्तदान में एक इंजेक्शन की नोक चुभने के अलावा कोई कष्ट नहीं होता।
एक बार रक्तदान में दस मिनट से अधिक समय नहीं लगता।
रक्तदाता खाली पेट रक्तदान नहीं करें।
कोविड-19 की वैक्सीन लेने के 28 दिन बाद ही रक्तदान कर सकते हैं।
कोविड-19 संक्रमण से मुक्त हुए लोग प्लाज्मा दान को प्राथमिकता दें।
क्या आप जानते हैं
रक्त का कोई भी दूसरा विकल्प अभी तक नहीं बना है।
रक्त किसी भी लेबोरेट्री या कारखाने में नहीं बनाया जा सकता।
रक्त केवल एक मनुष्य ही दूसरे मनुष्य के लिए दान कर सकता है।
अगर समाज का हर स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान के प्रति जागरुक हो तो रक्त के अभाव में हर बीमार या घायल की जान बचायी जा सकती है।
रक्तदान के साथ ही रक्तदाता के शरीर में रक्त निर्माण की प्रक्रिया शुरु हो जाती है और नये रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने से रक्तदाता ज्यादा स्फूर्त होते हैं।
रक्तदान के पश्चात छह सप्ताह में जहां पूरे रक्त के तत्व शरीर में बन जाते हैं, वहीं 90 दिन बाद कोई भी रक्तदाता पुनः आसानी से रक्तदान कर दूसरों का जीवन बचा सकते हैं।
रक्तदान करने से जहां रक्त की जांच हो जाती है, वहीं कई रोगों से भी बचाव होता है।












