रामगोपाल जेना/ चाईबासा : टाटा कॉलेज आदिवासी हॉस्टल के कॉमन रूम में प्रीफेक्ट बीरू गगराई की अध्यक्षता में एक आवश्यक बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता करते हुए बीरू गगराई ने झारखंड सरकार द्वारा 2016 से पूर्व की नियोजन नीति के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू किये जाने के संबंध में विस्तार से समझाया. मौके पर टाटा कॉलेज के आदिवासी हॉस्टल में रहकर ही उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले पूर्व छात्र नेता, गैरराजनीतिक सामाजिक संगठन झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक सन्नी सिंकू ने छात्रों को बताया कि झारखंड अलग राज्य की लड़ाई में टाटा कॉलेज आदिवासी हॉस्टल/जनरल हॉस्टल की बहुत बड़ी भूमिका रही है.(नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा कि झारखंड को अलग राज्य का अस्तित्व तो मिला, लेकिन जिस उद्देश्य से झारखंड अलग राज्य की मांग की गई, इन 22 वर्षों में झारखंड की कोई भी सरकार उस दिशा में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी. झारखंड अलग राज्य की मांग अलग भौगोलिक, भाषाई, सह अस्तित्व की संस्कृति, नौकरियों में अपेक्षित प्रतिनिधित्व के लिए की गई थी, लेकिन झारखंड की झारखंडी भाषा को राजभाषा के रूप में नहीं अपनाया गया, न ही झारखंड की मान्यता प्राप्त जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विभाग की स्थापना, विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में की जा सकी. लिपि से पढ़ना तो दूर, झारखंड में पेसा कानून भी लागू नहीं हो सका. झारखंड की पारंपरिक स्वशासन प्रणाली को नौकरशाहों के द्वारा विकृत किया जा रहा है. नियोजन और स्थानीय नीति 22 वर्षों में प्रवासी नौकरशाहों के हाथों षड्यंत्र की भेंट चढ़ती रही. खूंटकट्टी झारखंडी जमीन से बेदखल और विस्थापन का दंश झेल रहा है, इसलिए अब अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करना जरूरी है.(नीचे भी पढ़ें)
पूर्व बैंक कर्मी झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक अमृत मांझी ने कहा कि राज्य की हेमंत सरकार कहती है कि झारखंड के एसटी/एससी/ओबीसी वर्ग, यानी आरक्षित वर्ग के लोगों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. इसके लिए आगामी 27 फरवरी को विधानसभा के सत्र में आवश्यक कार्रवाई पूर्ण कर ली जाएगी. अगर 2016 से पूर्व की नियोजन नीति के आधार पर ही नियुक्ति करना था तो पहले ही सरकार द्वारा घोषित की गई नियुक्ति वर्ष 2021 से शुरू कर देते. इन 22 वर्षों में कितनों ही झारखंडी बेरोजगारों की उम्र सीमा पार हो गई है, जिसकी जिम्मेदार सरकार है. उन्होंने सरकार से राज्य की नौकरियों में उम्र सीमा का आधार वर्ष 2000 ही निर्धारित करने की मांग की. बैठक को हॉस्टल के सीनियर छात्र दीपक नायक, सुधीर सिंकू, दीपेश बिरुआ,ठाकुर टुडू,लक्ष्मीकांत मुखी,विवेक मुंडरी ने भी संबोधित किया. बैठक में हॉस्टल के सैकड़ों छात्र उपस्थित थे.




