रामगोपाल जेना/चाईबासा : विधायक-सांसद व जनप्रतिनिधियों को सिर्फ गांव के फुटबॉल मैच में अतिथि न बनाएं. चुनाव आने पर नेताओं से हंड़िया-दारू का पैसा न मांगें. ये हालात हम गांव वालों ने ही उत्पन्न किया है, जिससे नेता मजबूरी में हंड़िया-दारू का पैसा देते हैं. उक्त बातें आदिवासी हो समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम ने तांतनगर प्रखंड के सुरलू में आयोजित सामाजिक जागरूकता अभियान को संबोधित करते हुए ग्रामीणों से कहीं. श्री हेंब्रम ने ग्रामीणों से अपील किया है कि गांव की बदहाली के जिम्मेवार हमलोग भी हैं. (नीचे भी पढ़ें)
कार्यक्रम में आदिवासी हो समाज युवा महासभा की ओर से ग्रामीणों को कोल्हान प्रमंडल के क्षेत्र में चल रहे सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम के बारे में भाषा-संस्कृति, ग्राम सभा, सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई. लोगों को बताया गया कि गांव-समाज के विकास के साथ-साथ हो भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का सांगठनिक स्तर पर मुहिम चल रही है, जिसमें आगामी 21 अगस्त को दिल्ली जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया जायेगा, जिसमें विभिन्न राज्यों से हो समाज के प्रतिनिधि आयेंगे. सुरलू के ग्रामीणों ने हो भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए गांव स्तर से आर्थिक सहयोग एवं सामाजिक सहयोग करने की सहमति जतायी और युवाओं को गाँव से दिल्ली भेजने की जिम्मेवारी भी उठायी.(नीचे भी पढ़ें)
इस अवसर पर महासभा के सक्रिय सदस्य पोरसन बिरुली, दुदुगर पिंगुवा, मुंडा मोतीलाल बिरुली, उप मुखिया आश्रिता बिरुली, डाकुवा सोमाय गोप, सेविका बासमती बिरुली, रवीन्द्र बिरुली, नागीश्री बिरुली, विजय बिरुली, कुंडिया बिरूली, साजन बिरुली, कैरा बिरुली, आसमन कुंकल, प्रताप दोराइबुरू, स्नेहा बिरुली, रासमनी गोप, बबिता बिरुली, द्रौपदी गोप, सोमवारी बिरुली, सालमी कुंकल, सालू बिरुली, यशमती बिरुली आदि महिला समूह के सदस्य मौजूद थे.




