
रांची : झारखंड में एक बार फिर से बर्ड फ्लू का मानव जाति में पाये जाने वाले एवियन फ्लू ने दस्तक दे दी है. रांची स्थित झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में इलाजरत एक बच्चे की हुई जिनोमिक्स एंड जेनेटिक्स टेस्ट के बाद एविएन फ्लू की पुष्टि हुई है. उक्त बच्चा रामगढ़ के संदवाडीह का रहने वाला है. बर्ड फ्लू का ही वेरिएंट एविएन फ्लू से पीड़ित बच्चे को आइसोलेशन में रखा गया है. बच्चे की आयी रिपोर्ट के मुताबिक, उसमें एविएयन फ्लू (एच3एन2) पाया गया है. रिम्स के जेनेटिक्स व जिमोनिक्स विभाग में करायी गयी जांच के बाद माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ मनोज कुमार ने बताया कि डॉ राजीव मिश्रा की यूनिट में भर्ती एक बच्चे का सैंपल लिया गया, जिसमें बर्ड फ्लू की रिपोर्ट पोजिटिव आयी है. उन्होंने बताया कि पक्षियों में बर्ड फ्लू कहा जाता है लेकिन जब यह मनुष्यों में होता है तो इसे एवियन फ्लू कहा जाता है. मनुष्यों में एवियन फ्लू के दुर्लभ मामले ही देखने को मिलते हैं. यह राज्य का यह पहला मामला है जिसमें मनुष्यों में एवियन फ्लू एच3एन2 संक्रमित पाए गए हैं. अभी तक पक्षियों में बर्ड फ्लू (एच5एन2) के कई मामले सामने आए हैं जिसमें कई बार मुर्गियों, बत्तख समेत अन्य पक्षियों में संक्रमण हुआ है. इस नए मामले के बाद डाक्टरों का कहना है कि कोरोना काल में जो सावधानी बरती जाती थी उसी का अनुपालन करना उचित होगा.
ऐसे फैलता है एवियन फ्लू :
डॉक्टरों के अनुसार यह संक्रमण संक्रमित पक्षियों की लार, श्लेष्मा (बलगम) और मल में एवियन फ्लू के वायरस होते हैं. मनुष्यों का एवियन फ्लू वायरस से संपर्क तब हो सकता है जब कोई व्यक्ति वायरस वाली सतह को छूता है, फिर अपनी आंखों, नाक या मुंह को छूता है. ऐसी स्थिति में मनुष्यों में एवियन फ्लू संक्रमण के कारण रेस्पिरेटरी सिस्टम (सांस लेने की प्रक्रिया) में संक्रमण हो जाता है. इससे बुखार और खांसी से लेकर निमोनिया, एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम की वजह से मृत्यु भी हो सकती है. इसके कारण उल्टी और दस्त जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण हो सकते हैं.
ऐसे करें बचाव : (नीचे भी पढ़ें)
- हाथों की नियमित सफाई करें
- मास्क लगाए
- गंदी जगहों को छूकर मुंह, आंख, नाक ना छुए
- सर्दी होने पर डाक्टर से संपर्क कर समूचित इलाज करवाएं
- पक्षियों से दूरी बनाए व घर पर पक्षी पाल रहे हो तो उसे मनुष्यों से दूर रखें












