
जमशेदपुर : सोमवार को “ऑल इंडिया बैंक इंप्लाईज एसोसियेशन” पूर्व निर्धारित घोषित कार्यक्रम के अनुसार “झारखंड प्रदेश बैंक इंप्लाइज एसोसियेशन” के बैनर तले उप- महासचिव हीरा अरकने के नेतृत्व में पंजाब नेशनल बैंक इंप्लाइज यूनियन के सदस्यों ने बिष्टुपुर, आस्था ट्रेड सेंटर स्थित परिसर के समक्ष एकत्रित हुए और बैंक निजीकरण विरोधी दिवस के अन्तर्गत बैंको के निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन किया. ज्ञात हो के भाजपा नीत केंद्र सरकार पिछले 6 वर्षों में देश के विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के नीजिकरण के नीति धड़ल्ले से लागू कर रही है, जिसमें सेल, भेल, रेलवे, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और डीफेंस जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में निजी निवेश को बढ़ावा देने के साथ इनमे विदेशी निवेश की सीमा को 100 फीसदी तक करने का निर्णय यह सरकार ले चुकी है. वितिय संस्थानों में जनरल इंश्योरेंस के एकीकरण, एलआईंसी के पूंजी का विनिवेश का फैसला सरकार ले चुकी है. वर्ष 2018 में देना बैंक और विजया बैंक का विलय बैंक ऑफ बड़ौदा में किया गया था. वर्ष 2019 में 10 बैंको को आपस में विलय कर 4 बैंक बना दिये गए. सरकार द्वारा बैंको की स्थिति सुधारने और ग्लोबल स्तर के बैंक के बनाने के लिए बैंको का विलय किया गया. आज प्रश्न है कि क्या बैंको की स्थिति सुधर गई, क्या विलय से बैंक ग्लोबल स्पर्धा के लायक हो गए? ऐसा नहीं हुआ होगा, चाहे सभी बैंको को विलय कर दिया जाये. दर असल सरकार की मंशा बैंको को प्राइवेट हंथो में देने की है. बैंको की आर्थिक हालात सुधारने की. इतनी तेजी से बैंको के विलय का किया जाना, बाकी को प्राइवेट हाथों में देने की बात देश कि आर्थिक रूप को कमजोर करेगा. बैंको को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए बैंको के बड़े बड़े एन पी ए कि वसूली की आवश्यकता है. इस कार्यक्रम को अभिनव झा, राजीव कुमार झा ने संभोधित किया और निजीकरण से होने वाले नुकसान के बारे में बताया. उपस्थित सदस्यों ने निजीकरण नीति के खिलाफ, बैंकों में रिक्रूटमेंट करने के लिए,एन पी ए रिकवरी के लिए, बैंकों में ग्राहक सुविधा बढ़ाने के लिए नारे लगाए. इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए राजू भगत, अशोक रजक, मनोज रजक, पांडु राम सोरेन, नम्रता कुमारी, महीना प्रभाकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.







