जमशेदपुर : जमशेदपुर का जेएच ताराोपर स्कूल ने क्लासरूम टू क्लाइमेट एक्शन क्रूसेडर्स सतत जीवनशैली पहल में देश के टॉप 3 स्कूलों में जगह बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की है. स्वर्गीय एपीआर नायर की दूरदर्शी विरासत, जिनकी सुलभ एवं मूल्य-आधारित शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता ने समाज-केन्द्रित संस्थानों की नींव रखी से प्रेरित क्लासरूम्स टू क्लाइमेट एक्शन क्रूसेडर्स (सीसीएसी) 2025–26 उसी दृष्टि का स्वाभाविक विस्तार है. शिक्षा के केंद्र में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को स्थापित करते हुए यह पहल इस विश्वास को साकार करती है कि विद्यालय केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक भी गढ़ते हैं. केरल पब्लिक स्कूल ट्रस्ट की एक प्रमुख पहल के रूप में सीसीएसी 2025–26 ने देशभर के विद्यालयों में क्रियात्मक एवं संरचित शिक्षण के माध्यम से पर्यावरणीय जिम्मेदारी को स्थापित करने का एक राष्ट्रीय प्रयास प्रस्तुत किया है. इस पहल की परिकल्पना एवं क्रियान्वयन केपीएस फाउंडर वाइस चेयरमैन विजयम करथा द्वारा सृष्टि जैन की ओर से किया गया. यह पहल एक सशक्त सहयोगी तंत्र का उदाहरण है जो स्थिरता की दिशा में कार्यरत है. जुलाई 2025 से अप्रैल 2026 तक चले इस प्रथम चरण में 78 विद्यालय जुड़े, जिनमें से 50 विद्यालयों ने कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूर्ण किया तथा 10 विद्यालय अंतिम चरण तक पहुंचे. यह विभिन्न राज्यों की सहभागिता को दर्शाता है. (नीचे भी पढे़ं)

सीसीएसी की विशेषता इसका सहयोग-आधारित मॉडल रहा, जिसमें प्रत्येक गतिविधि के लिए विद्यालयों को गैर-सरकारी संगठनों, संस्थानों एवं समुदाय के साथ साझेदारी करना अनिवार्य था. इससे पर्यावरणीय प्रयास केवल विद्यालय तक सीमित न रहकर समुदाय-आधारित और प्रभावी बने. विद्यालयों ने वृक्षारोपण, परिसर हरितीकरण, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, जन-जागरूकता अभियान एवं सामुदायिक सहभागिता जैसी गतिविधियों को संरचित मार्गदर्शन के साथ क्रियान्वित किया. इस पहल का प्रभाव अत्यंत गहरा और परिवर्तनकारी रहा. विद्यार्थियों ने निष्क्रिय भागीदारी से आगे बढ़कर सक्रिय नेतृत्व एवं उत्तरदायित्व को अपनाया. विद्यालयों में “ग्रीन टीम्स” का गठन हुआ तथा दैनिक कार्यप्रणाली में पर्यावरणीय दृष्टिकोण का समावेश हुआ. शिक्षकों में भी एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा गया, जहां पर्यावरणीय कार्य केवल विषय नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी बन गया. सहयोग इस पहल की मुख्य शक्ति बनकर उभरा, जहां विद्यालयों ने समुदाय एवं अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य किया. (नीचे भी पढे़ं)
इस पहल का समापन 17 से 19 अप्रैल 2026 तक ऐशिया प्लेट्यू में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ हुआ. इस अवसर पर देशभर के प्रतिभागी विद्यालयों, शिक्षकों एवं सहयोगी संस्थाओं ने भाग लिया. कार्यक्रम में प्रस्तुतीकरण, विचार-विमर्श एवं भविष्य की रणनीति पर चर्चा की गई. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अनिल स्वरूप भारत सरकार के पूर्व सचिव (कोयला मंत्रालय एवं स्कूल शिक्षा मंत्रालय) रहे. अपने उद्बोधन में उन्होंने इस पहल को “समय की आवश्यकता के अनुरूप एक अत्यंत प्रभावी और दूरदर्शी प्रयास” बताया. उन्होंने विशेष रूप से विद्यालयों द्वारा बाहरी संस्थाओं के साथ किए गए सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहलें शिक्षा को समाज से जोड़ती हैं और विद्यार्थियों में वास्तविक समस्याओं को समझने तथा समाधान खोजने की क्षमता विकसित करती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे प्रयास भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सीसीएसी 2025–26 की एक प्रमुख विशेषता यह रही कि सभी पुरस्कार एवं सम्मान स्वर्गीय ए.पी.आर. नायर मेमोरियल ट्रॉफीज़ के अंतर्गत प्रदान किए गए, जो उनके मूल्यों एवं दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हैं.
राष्ट्रीय विजेता – सीसीएसी 2025–26 (स्वर्गीय ए.पी.आर. नायर मेमोरियल ट्रॉफीज़)
विजेता (1,00,000 रुपये ) : एसबीओए पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कोचीन, केरल
प्रथम उपविजेता (75,000 रुपये) : भवन्स मुंशी विद्यााश्रम, त्रिपुनिथुरा, केरल
द्वितीय उपविजेता (₹50,000) : एसबीओए मैट्रिक हायर सेकेंडरी स्कूल, कोयंबटूर, तमिलनाडु
तृतीय उपविजेता (25,000 रुपये) : जेएच तारापोर स्कूल जमशेदपुर (नीचे भी पढ़ें)
इसके अतिरिक्त, नवाचार, परंपरागत ज्ञान, एवं प्रभावशाली कार्यों के लिए विशेष पुरस्कार भी प्रदान किए गए. सभी प्रतिभागी विद्यालयों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को सहभागिता प्रमाणपत्र दिए गए. प्रथम चरण से प्राप्त अनुभवों ने यह स्पष्ट किया कि जहां सहभागिता और सहयोग अत्यंत प्रभावी रहे, वहीं आगे के चरण में गहन समझ, मापनीय परिणाम, मजबूत साझेदारियां तथा विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति और चिंतन को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है. आगामी चरण (2026–27) में इस पहल को और व्यापक एवं प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा, जिसमें अधिक विद्यालयों की भागीदारी, मजबूत सहयोगी तंत्र, प्रभाव-आधारित मूल्यांकन, छात्र नेतृत्व को प्रोत्साहन, एवं विस्तृत पुरस्कार प्रणाली शामिल होगी. सीसीएसी केवल एक पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में एक सांस्कृतिक परिवर्तन का प्रयास है. यह उस मूल समस्या को संबोधित करता है जहां जागरूकता तो है, परंतु निरंतर क्रियान्वयन और स्वामित्व का अभाव है.इस पहल ने यह सिद्ध कर दिया है कि विद्यालय तैयार हैं, विद्यार्थी सक्षम हैं, और व्यवस्था परिवर्तन संभव है. क्लासरूम्स टू क्लाइमेट एक्शन क्रूसेडर्स शिक्षा को उद्देश्यपूर्ण दिशा देते हुए एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर रहा है, जहां विद्यार्थी केवल सीखते ही नहीं, बल्कि परिवर्तन के वाहक बनते हैं.











