वाशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले एक बड़ा फैसला लेते हुए ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2025’ के तहत मिलनेवाले प्रतिबंधात्मक अधिकारों को अस्थाई रूप से रोक दिया है. वैश्विक बादार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बाद ट्रंप प्रशासन ने यह कदम उठाया है. इस फैसले से भारत और चीन जैसे देशों को बड़ी राहत मिली है, जो रूसी तेल का आयात कर रहे थे और जिन पर 100% आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की चेतावनी दी जा रही थी. (नीचे भी पढ़ें)
व्हाइट हाउस की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्राहम एक्ट की धारा 115 के तहत अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए प्रतिबंधों और शुल्कों को माफ करने का प्रमाण पत्र अमेरिका कांग्रेस को सौंप दिया है. प्रशासन का कहना है कि बढ़ती महंगाई और वैश्विक तेल संकट के बीच इस समय प्रतिबंधों में छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है. ट्रंप सरकार का यह कदम अमेरिका में ईंधन की आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने और आम उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास माना जा रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है. इस समझौते के तहत रूस तुरंत 300000 टन डीजल की आपूर्ति अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में करेगा, जिसके बाद आनेवाले हफ्तों में लाखों टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति की जाएगी. इसके अलावा, अमेरिका ने संघर्ष विराम ढांचे के तहत यूक्रेन से भी रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले न करने का आग्रह किया है ताकि वैश्विक आपूर्ति शृंखला प्रभावित न हो. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार अमेरिका का यह फैसला उसकी व्यापार नीति की अनिश्चितता को उजागर करता है. उन्होंने कहा कि चीन के पपास पहले से ही सुरक्षात्मक उपाय थे, जबकि भारत पर बार-बार दबाव बनाने की कोशिश की जाती है. (नीचे भी पढ़ें)
100% टैरिफ का खतरा टलने के बाद भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर उम्मीदें फिर से बढ़ गई हैं. हालांकि भारत पहले से ही अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए विभिन्न देशों से तेल खरीदने की नीति पर कायम रहा है. लेकिन अमेरिकी प्रतिबंध कानून का असर भारत-अमेरिका संबंधों पर पढ़ रहा था.





