गालूडीह : बड़ाखुर्शी पंचायत के पायरागुड़ी गांव में शनिवार को दुर्गापूजा के अवसर पर आस्था और परंपरा का संगम देखने को मिला. सैकड़ों श्रद्धालु शीतला माता मंदिर से जमीन पर दंडवत देते हुए मां दुर्गा मंदिर पहुंचे और सुख-समृद्धि की कामना की. महासप्तमी पर स्वर्णरेखा नदी के कुलियाना घाट से राजा क्षेत्रमोहन सिंह के वंशज तीन तलवारों के साथ कलश में पवित्र जल लेकर पहुंचे. इसके बाद पुजारी मुरली मनोहर शर्मा ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई. इस वर्ष बासंती प्रसाद सिंह के अस्वस्थ होने के कारण उनके पुत्र सुरजीत सिंह और परिवार के अन्य सदस्य परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)
1760 से चली आ रही परंपरा
मान्यता है कि वर्ष 1760 में राजा क्षेत्रमोहन सिंह ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष के दौरान विजय की कामना से दुर्गापूजा शुरू की थी. करीब 266 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी ग्रामीणों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी हुई है.





