जमशेदपुर : देश की रक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना करने वाले कारगिल युद्ध के वीर माणिक बरदा के जीवन में एक बार फिर नई उम्मीद जगी है. युद्ध के दौरान अपने दोनों हाथ गंवाने वाले माणिक बरदा को हेल्प क्रॉस सोसाइटी, इनाली फाउंडेशन एवं रोटरी क्लब पुणे की पहल से दोनों कृत्रिम हाथ लगाए गए. यह केवल कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराने की पहल नहीं, बल्कि एक वीर सैनिक को आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान और जीवन को नए सिरे से आगे बढ़ाने का अवसर देने का भावनात्मक प्रयास है. माणिक बरदा की कहानी साहस, त्याग और संघर्ष की कहानी है. देश की सेवा के दौरान उन्होंने ऐसी कठिन परिस्थितियों का सामना किया, जिनकी कल्पना करना भी आसान नहीं है. (नीचे भी पढ़ें)
दोनों हाथ गंवाने के बाद दैनिक जीवन की चुनौतियाँ कितनी कठिन हो सकती हैं, इसे सहज ही समझा जा सकता है. इसके बावजूद उनके जीवन में आत्मसम्मान और आगे बढ़ने की उम्मीद को मजबूत करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण है. शिविर के समापन समारोह में मुख्य अतिथि सलिल मिश्रा (आइआरएस), प्रिंसिपल कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स, जमशेदपुर ने हेल्प क्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन कुलवंत सिंह बंटी, अध्यक्ष बीके शर्मा और पूरी टीम के सेवा कार्यों की सराहना की. उन्होंने कहा कि कृत्रिम हाथ दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनने और अपने जीवन को नए तरीके से शुरू करने में मदद करेंगे. विशिष्ट अतिथि ट्रैफिक डीएसपी नीरज पाठक ने कहा कि जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की यह पहल शहर के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है. (नीचे भी पढ़ें)
कृत्रिम अंगों से लाभान्वित लोगों की खुशी और उनके आशीर्वाद इस सेवा की सार्थकता को दर्शाते हैं. विशिष्ट अतिथि एवं प्रसिद्ध तीरंदाजी प्रशिक्षक पूर्णिमा महतो ने जम्मू-कश्मीर की उस खिलाड़ी का उदाहरण दिया, जो दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद तीरंदाजी में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं. उन्होंने लाभार्थियों से प्रेरणा लेते हुए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और अपनी क्षमताओं को पहचानने का आह्वान किया. प्रभाकर राव ने लाभार्थियों को कृत्रिम हाथों के नियमित अभ्यास, आवश्यक व्यायाम और खेलकूद के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी, ताकि वे दैनिक गतिविधियों में अधिक सहजता प्राप्त कर सकें. हेल्प क्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन कुलवंत सिंह बंटी ने कहा कि माणिक बरदा जैसे वीर सैनिक को दोनों कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराने का अवसर मिलना संस्था के लिए गर्व और सौभाग्य की बात है. उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल कृत्रिम अंग उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जरूरतमंद दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का अवसर देना है. उन्होंने इस सेवा कार्य में सहयोग देने वाली इनाली फाउंडेशन, रोटरी क्लब पुणे और सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया. (नीचे भी पढ़ें)
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष बीके शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया. इस अवसर पर मनोज सिन्हा, विनोद कसेरा, मुकेश कुमार, अमित नागेलिया, राजेश कुमार, सुशील सिंघानिया, गोपाल प्रसाद सुरेश शर्मा मोहन लाल बिनोद पंडित सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे. माणिक बरदा को मिले कृत्रिम हाथ इस बात का संदेश हैं कि कठिन परिस्थितियां जीवन की राह को चुनौतीपूर्ण जरूर बना सकती हैं, लेकिन सहयोग, इच्छाशक्ति और मानवीय संवेदना नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती हैं.













