पटना : बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग से राष्ट्रीय कला पुरस्कार प्राप्त करने पर मीडिया से अपनी भावना साझा करते हुए कल्पना पटवारी ने कहा था प्रारब्ध से ही मुझे बिहार की संस्कृति की सेवा प्राप्त हुई है, इसीलिए असम की होते हुए भी मेरी भावनाओं में बिहार की लोक संस्कृति और बिहार की गौरवशाली विरासत के प्रति अनुराग है. इसलिए मुझमें बिहार की संस्कृति के हित में बहुत कुछ करने की भावना है. इस छठ महापर्व से कल्पना पटवारी उसी भूमिका में प्रस्तुत हो रही हैं, बिहार की सभी भाषाओं में छठ के गीत लेकर. बिहार में ऐसा पहली बार है कि किसी एक गायिका ने बिहार की सभी भाषाओं में सात छठ-गीत प्रस्तुत किये हैं और इसका श्रेय मिला है कल्पना पटवारी को. (नीचे भी पढ़ें)
क्या आप जानते हैं कि यूनेस्को की अमूर्त विरासतों की सूची में छठ महापर्व को शामिल करने के लिए इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एण्ड कल्चरल हेरिटेज (इन्टैक) द्वारा जो डोजियर तैयार करके भेजा गया है, उसमें हृदय नारायण झा लिखित एवं संकलित ‘छठ गीत (सर्वसौभाग्य दायकम) को भी शामिल किया गया है. इसमें छठ महापर्व का पौराणिक लौकिक महत्व सहित बिहार के मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका, वज्जिका के पारंपरिक छठ गीतों सहित स्वरचित मैथिली एवं भोजपुरी छठ गीतों को भी शामिल किया गया है. इस छठ महापर्व में पुस्तक में शामिल सात गीतों की ‘छठ गीतमाला’ का वीडियो छठ व्रतियों की सेवा में कल्पना पटवारी द्वारा छठी माइया को अर्पण किया जा रहा है, जो शीघ्र ही यूट्यूब चैनल म्यूजिक बॉक्स पर रिलीज होने जा रही है. (नीचे भी पढ़ें)
यह दुर्लभ संयोग है कि इस छठ गीत माला में दो मैथिली ‘चारि पहर राति जल थल सेविलहुँ’ और ‘‘कातिक मास इंजोरिया ई दुई तिथि पावन हे, दो भोजपुरी -’जगत के पालक दीनानाथ कर दिहीं हमके सनाथ’ और ‘दरसन माँगीला तोहार हे गंगा मैया’. मगही – छोटी मुटी मालिन बेटी के भुइयाँ लोटे केस’ अंगिका-’छठि मइया अइतई अंगनमा सजन हम करबई बरतिया’ और वज्जिका छठ गीत- रिमझिम बुन्दवा बरसि गेल ओरियनि मोती चूए’ कल्पना की सुरीली आवाज में सुनने का अवसर आया है. कल्पना पटवारी ने भावी योजनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि बिहार गौरवशाली पौराणिक एवं ऐतिहासिक विरासतों सहित लोक सांसांस्कृतिक चेतना का प्रदेश है. यहां बहुत कुछ करने के लिए है. जितना संभव होगा मैं अवश्य करूंगी.












