जमशेदपुर: सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर में जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वैद्यनाथ मांडी, प्रदेश अध्यक्ष, ट्राइबल इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री झारखंड उपस्थित थे. इस अवसर पर डॉ. संदीप घोष चौधरी, निदेशक, सीएसआईआर-एनएमएल; डॉ. एमएम ह्यूमेन; जय शंकर शरण तथा डॉ. परीक्षित मुंडा मंच पर उपस्थित रहे. कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन एवं राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’के गायन के साथ हुआ.डॉ. संदीप घोष चौधरी, निदेशक, सीएसआईआर-एनएमएल ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षकों, जनजातीय समुदायों के 144 स्कूली विद्यार्थियों, शिक्षा निकेतन, डिमना के प्रतिष्ठित जनजातीय प्रतिनिधियों तथा संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का हार्दिक स्वागत किया. उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस देश के उन वीर जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के साहस, बलिदान और योगदान को सम्मानित करने का अवसर है, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यह दिवस भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत, संस्कृति, परंपराओं, शौर्य और ऐतिहासिक योगदान को संरक्षित करने तथा जनजातीय पहचान एवं विकास को प्रोत्साहित करने का संदेश देता है.(नीचे भी पढ़े)

उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साहस, त्याग तथा न्याय, समानता और जनजातीय अस्मिता के लिए किए गए संघर्ष को याद किया. उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन असंख्य जनजातीय नायकों के योगदान से सशक्त हुआ था. उन्होंने जनजातीय समाज के समक्ष चार प्रमुख जिम्मेदारियों पर विशेष बल दिया, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, सामाजिक न्याय को बढ़ावा, जल-जंगल-जमीन की रक्षा तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा सुनिश्चित करना. उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन नेतृत्व, एकता और सामूहिक प्रयास की प्रेरणा देता है. उनके आदर्शों को शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन और समावेशी विकास के माध्यम से व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.उन्होंने विद्यार्थियों को जनजातीय महानायकों के चरित्र, साहस और दृढ़ संकल्प से प्रेरणा लेकर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया.डॉ. परीक्षित मुंडा, अध्यक्ष, जनजातीय गौरव दिवस समारोह, सीएसआईआर-एनएमएल ने अपने संबोधन में कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा राष्ट्र के समग्र विकास में जनजातीय गौरव, अस्मिता और सशक्तिकरण के महत्व पर प्रकाश डाला.(नीचे भी पढ़े)

. कार्यक्रम के प्रमुख वक्ताओं में डॉ मनोज एम. ह्यूमेन, मुख्य वैज्ञानिक एवं एससी/एसटी संपर्क अधिकारी, सीएसआईआर-एनएमएल ने देश में जनजातीय समुदायों के उत्थान एवं विकास के लिए संविधान में किए गए विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी. उन्होंने जनजातीय समुदायों के अधिकारों, कर्तव्यों तथा विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों और सरकारी सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताया.मुख्य अतिथि वैद्यनाथ मांडी, प्रदेश अध्यक्ष, टीआईसीसीआई , झारखंड ने जनजातीय उद्यमिता एवं आर्थिक सशक्तिकरण के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि ट्राइबल इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री सरकारी योजनाओं, एमएसएमई पंजीकरण, जीएसटी, लाइसेंस तथा आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रियाओं के माध्यम से जनजातीय उद्यमियों को व्यवसाय स्थापित करने एवं आगे बढ़ाने में सहयोग प्रदान करता है. उन्होंने जनजातीय युवाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे आने, रोजगार के अवसर सृजित करने तथा अपने उत्पादों को व्यापक बाजारों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि टीआईसीसीआई ऐसे सभी जनजातीय उद्यमियों के सपनों को साकार करने में सहयोगी बन सकता है, जो स्वयं के साथ-साथ अपने समुदाय की समृद्धि में भी योगदान देना चाहते हैं. एक छोटे चाय विक्रेता के सफल उद्यमी बनने का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा में प्रयास से व्यवसाय को आगे बढ़ाया जा सकता है. (नीचे भी पढ़े)

उन्होंने युवाओं से भय, आत्म-संदेह, नकारात्मक सोच, भाग्य पर निर्भरता तथा समय की कमी जैसे बहानों को पीछे छोड़कर आत्मविश्वास के साथ सफलता की ओर बढ़ने का आह्वान किया. इसके अतिरिक्त, जय शंकर शरण, नियंत्रक प्रशासन (सीओए), सीएसआईआर-एनएमएल ने जनजातीय समुदायों के कल्याण एवं विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं एवं अवसरों की जानकारी दी.कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कुल 144 विद्यार्थियों (69 बालक एवं 75 बालिकाएं) तथा 7 शिक्षकों एवं विद्यालय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.कार्यक्रम के दूसरे सत्र में जनजातीय विद्यार्थियों को सीएसआईआर-एनएमएल की विभिन्न अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी ) प्रयोगशालाओं तथा खनिज, धातु एवं पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में संचालित गतिविधियों से परिचित कराया गया. इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय अनुसंधान सुविधाओं एवं प्रयोगशालाओं को समाज और आम लोगों के और अधिक निकट लाना तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान एवं नवाचार के प्रति रुचि विकसित करना था.अंत में, कार्यक्रम के संयोजक डॉ. कृष्ण कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया.















