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शुक्रवार, मई 14, 2021
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jamshedpur-rural- घाटशिला के काड़ाडुबा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की एएनएम सुबोधिनी बेरा ने एक साल में अकेले कराया 397 प्रसव, उपायुक्त ने की सराहना

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घाटशिला : लोक कल्याण के लिए अपने गृहस्थ जीवन का त्याग कर 24 घंटे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र काराडूबा, दामपारा क्षेत्र में रहकर एएनएम सुबोधिनी बेरा चिकित्सकीय सुविधा मुहैया करा रही है. क्षेत्र के लोगों के लिए आदर्श बनकर उभर रही है. यह कहानी है बहरागोड़ा प्रखंड की रहने वाली सुबोधिनी बेरा की जो प्रखंड घाटशिला के दामपाड़ा क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र काड़ाडुबा में पदस्थापित हैं. इन्होंने विगत 1 साल में 397 गर्भवती महिलाओं की सफल प्रसव कराई है. एएनएम सुबोधिनी बेरा पिछ्ले कई सालों से 24 घंटे स्वास्थ्य केंद्र में रहते हुए जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सेवा दे रही हैं, इस कारण दामपड़ा क्षेत्र के लोग उनकी कार्यशैली से काफी प्रभावित है और उन्हें अपना आदर्श मान रहे हैं. दूर दराज़ से इस प्राथमिक केंद्र, काड़ाडूबा में डिलीवरी कराने आने वाले ग्रामीण कहते हैं कि एक निजी अस्पताल में डिलीवरी करवाने में अधिक पैसे सिक्योरिटी मनी के रूप में लिया जाता है, दवाइयां भी अलग खरीदनी पड़ती या ज़्यादातर सिजेरियन जैसे परिस्थति से गुज़ारना पड़ता हैं.परंतु काड़ाडूबा केन्द्र में एएनएम दीदी महिलाओं का सफल प्रसव कराती है.
काड़ाडुबा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आई हुई कोई भी गर्भवती महिला को शायद ही ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ती है
एएनएम सुबोधिनी बेरा के सेवाभाव उनके अनुभवों का पूरा लाभ दामपारा क्षेत्र की गर्भवती महिलाएं और जन्मजात बच्चों को मिलता है.जब सुबोधिनी बेरा से यह पूछा गया कि क्या उन्हें अपने घर जाने, अपने परिवार के बीच समय बिताने का मन नहीं होता,तो उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में यह केंद्र एकमात्र आपात इलाज का साधन है, आधी रात में या अवकाश के दिन में भी लोग इस स्वास्थ्य केंद्र में आते हैं कि एएनएम तो होगी ही कुछ दवाइयां मिल जाएगी, लोग छोटे बच्चों की बीमारी की दवाइयां लेने आते हैं. जिन बच्चों की डिलीवरी उनके द्वारा की गई है उन बच्चों की मदद करने से वे पीछे कैसे हट सकती हैं.यदि वे अवकाश में चल जाती हैं तो फिर यहां और कोई देखने वाला नहीं है- वे बताती हैं कि इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को भी अपने घर की तरह संभालती हैं एक स्वीपर से लेकर सभी चिकित्सकीय सुविधा देने तक का वे खुद काम करती हैं और लोग बहुत भरोसे से उनके पास आते हैं इसी विश्वास के कारण चाहते हुए भी वे अपने परिवार को समय नहीं दे पाती हैं.

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उन्होंने बताया कि कभी-कभी ऐसी भी स्थिति आई है कि उन्हें मोमबत्ती /लालटेन की रोशनी में भी गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी करानी पड़ी है, क्योंकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इनवर्टर/ जनरेटर की व्यवस्था नहीं है, फिर भी वे अपने तन मन से लोगों की सेवा करने से पीछे नहीं हटती है क्योंकि इससे उन्हें खुशी मिलती है और जब लोग उन्हें कहते हैं कि आप हमारे लिए भगवान का वरदान है तो उन्हें लगता है कि उनका इतना परिश्रम सफल हुआ. इसी वर्ष जुलाई माह में सेवानिवृत्त हो रहीं श्रीमती बेरा को लेकर लोगों का भी कहना है कि सरकार इनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी इस सेंटर में उनको रखे क्योंकि इतनी निस्वार्थ भाव से सेवा करना किसी के बस की बात नहीं है.उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सूरज कुमार एएनएम सुबोधिनी बेरा की कार्यकुशलता की तारीफ करते हुए कहते हैं कि उनकी सेवा भाव से हम सभी को समाज के प्रति सच्ची निष्ठा व तत्परता से कार्य करने की सीख मिलती है. उन्होने जिलेवासियों से आग्रह व अपील किया है कि जच्चा-बच्चा की सुरक्षा को देखते हुए इन्स्टीट्यूशनल डिलीवरी को हमेशा प्राथमिकता दें और जिले में कार्यरत प्रशिक्षित व अनुभवी स्वास्थकर्मी की सेवा का लाभ अवश्य लें.

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