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jharkhand-panchayat-election-झारखंड के पंचायत चुनाव की शुरू हुई सुगबुगाहट, चुनाव क्षेत्रों के सीमांकन और आरक्षण को लेकर जिले के डीसी को दिया गया आदेश, नये सिरे से तय होगी सीमाएं और तय होगा आरक्षण, जानें क्या होगा आरक्षण और सीमांकन का पैमाना

जमशेदपुर : झारखंड पंचायत चुनाव 2021 के लिए सीमांकन एवं आरक्षण संबंधित कार्य समय पर पूरा करने के लिए झारखंड राज्य चुनाव आयोग का जिला निर्वाचन पदाधिकारी को निर्देश दिया है. इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है. इसके तहत नवंबर माह तक चुनाव कराने के लिए तैयारी शुरू की गयी है. इसके तहत नये सिरे से चुनाव क्षेत्रों का सीमांकन और आरक्षण को तय किया जाना है, जिसके लिए जिला स्तर पर डीसी यानी जिला निर्वाची पदाधिकारी को निर्देश दे दिये है. यह कहा गया है कि आगामी त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन, 2021 के निमित्त, झारखण्ड पंचायत राज अधिनियम, 2001 की धारा 17. 36 एवं 51 एवं धारा-21, 40 एवं 55 तथा झारखण्ड पंचायत निर्वाचन नियमावली, 2001 के नियम 9 से 18 तक में स्थानों एवं पदों के लिए विहित प्रावधानों के अनुरूप अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं के लिए स्थानों का आरक्षण एवं आवंटन संबंधित जिले के जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) सह-उपायुक्त द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग के अधीक्षण, निदेशन एवं नियंत्रण में यथा विहित रीति से किया जाएगा. यह कहा गया है कि झारखण्ड राज्य अन्तर्गत सामान्य क्षेत्र में निर्वाचन क्षेत्रों के लिए स्थानों एवं पदों का आरक्षण एवं आवंटन, झारखण्ड पंचायत निर्वाचन नियमावली, 2001 के नियम 9(क) तथा 9 (ग) में विहित प्रक्रिया के तहत् तथा अनुसूचित क्षेत्र में निर्वाचन क्षेत्रों के लिए स्थानों एवं पदों का आरक्षण एवं आवंटन नियम 9(ख) तथा 9 (घ) में विहित प्रक्रिया के तहत् की जाएगी. इस नियमावली की उपाबद्ध अनुसूची में उदाहरण 1. 2 एवं 3 द्वारा आरक्षण एवं आवंटन की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट किया गया है. उक्त नियमावली के नियम 10 के अधीन आरक्षण हेतु पदों की संख्या निर्धारित करने के लिए गणना के निमित्त आधे या आधे से कम भाग को छोड़ दिया जाएगा तथा आधे से अधिक भाग को एक माना जाएगा. इस संबंध में नियमावली के उपर्युक्त प्रावधानों के अनुरूप आरक्षण एवं आवंटन की कार्रवाई प्रपत्र-2 में तैयार की जाएगी. वर्ष 2021 का आम निर्वाचन तृतीय आम निर्वाचन है. नियमावली के नियम 11 के अधीन इस तृतीय पंचायत निर्वाचन 2021 में विभिन्न कोटियों को आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों के आवंटन हेतु पिछड़ा वर्ग, अन्य अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति के क्रम में निर्वाचन क्षेत्र आवंटित किए जाएंगे. परंतु यह कि कुछ जिलों यथा पलामू, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, साहेबगंज, सरायकेला-खरसावा, चतरा एवं गोड्डा अन्तर्गत वैसे ग्राम पंचायतों के आंशिक या पूर्णतः क्षेत्र नगरपालिका क्षेत्रों में शामिल हो जाने अथवा लातेहार जिलान्तर्गत सरयू प्रखण्ड के सृजन अथवा पश्चिम सिंहभूम जिला में ग्राम पंचायतों के प्रखण्ड स्थानान्तरण अथवा गिरिडीह जिलान्तर्गत बगोदर प्रखण्ड के बैंकों एवं दामा ग्रामों की जनगणना के प्रकाशित आंकड़ों में संशोधन के कारण आंशिक या पूर्णरूप से उन पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है. ऐसे प्रभावित क्षेत्रों के प्रादेशिक / क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में उत्पन्न परिवर्तन के कारण प्रपत्र 2 का भाग एक दो तीन एवं चार तथा प्रपत्र-3 को नये सिरे से वर्ष 2011 की जनगणना के सुसंगत प्रकाशित आंकड़ों के आधार पर तैयार किए जाएंगे. परंतु आरक्षण एवं आवंटन के क्रम में तृतीय आम निर्वाचन मानकर पिछड़ा वर्ग, अन्य, अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति के क्रम में आवंटन की कार्रवाई की जाएगी. तदनुरूप प्रपत्र 2 का भाग-एक, दो, तीन एवं चार तथा प्रपत्र 3 को तैयार किया जाएगा. उपर्युक्त दिशा-निर्देश के आलोक में त्रिस्तरीय पंचायत के स्थानों एवं पदों का पिछड़ा वर्ग, अन्य, अनुसूचित जन जाति एवं अनुसूचित जाति के लिए कोटिवार आरक्षण एवं आवंटन तथा उन सभी कोटि की महिलाओं के लिए अनुमान्य आरक्षण एवं आवंटन का प्रस्ताव झारखण्ड पंचायत निर्वाचन नियमावली, 2001 के अधीन राज्य निर्वाचन आयोग के अधीक्षण, निदेशन एवं नियंत्रण में जिला दण्डाधिकारी ही तैयार करने के लिए अधिकृत है. अतएव प्रपत्र-2 (भाग एक, भाग-दो, भाग-तीन एवं भाग चार) तथा प्रपत्र-3 में तैयार कर दिनांक 03.07.2021 तक अनिवार्य रूप से कार्य पूर्ण कर लिया जाए. प्रपत्र 2 एवं 3 के आयोग स्तर पर सत्यापन हेतु भेजने के पूर्व जिला स्तर पर कैम्प कर सत्यापन करने के उपरांत ही जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) के नेतृत्व में ऐसे पदाधिकारियों/कर्मी के माध्यम से भेजा जाए जो आयोग द्वारा उठायी गई आपत्तियों का तत्काल निराकरण करने में समर्थ हो बेहतर होगा कि इस कार्य के लिए जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) के साथ उसी पदाधिकारी / कर्मी को प्राधिकृत करते हुए प्रतिनियुक्त किया जाए जिन्होंने आरक्षण प्रस्ताव तैयार करने में सहयोग प्रदान किया है, ताकि वे पदाधिकारी / कर्मी आरक्षण एवं आवंटन प्रस्ताव के मिलान में समुचित सहयोग प्रदान कर सके. जिलों से आयोग को सत्यापन हेतु भेजे जाने वाले आरक्षण एवं आवंटन के प्रस्ताव (प्रपत्र-2 एवं) (3) के प्रत्येक पृष्ठ पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) – सह उपायुक्त का हस्ताक्षर होना अनिवार्य है. राज्य के विभिन्न जिलों का आरक्षण एवं आवंटन संबंधी तैयार किए गए प्रपत्रों अर्थात् प्रपत्र 2 (भाग-एक, दो, तीन एवं चार तथा प्रपत्र 3 में प्रविष्टियों का आयोग स्तर पर सत्यापन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सम्पन्न किया जाएगा. इस संबंध में जिलावार कार्यक्रम कालांतर में निर्धारित कर संसूचित किया जाएगा. स्मरण रहे कि यह एक कालबद्ध कार्यक्रम है एवं इसमें किसी प्रकार का जिला स्तर से निर्वाचन की प्रक्रिया को विलम्ब करने का आधार बनने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, जिसे आयोग द्वारा गंभीरता से लिया जाएगा. जिला दण्डाधिकारी द्वारा आरक्षण एवं आवंटन से संबंधित पंजियों का संधारण नियम 15 के तहत प्रपत्र 2 ( भाग- एक, दो, तीन एवं चार ) में किया जाएगा. राज्य निर्वाचन आयोग स्तर पर सत्यापन उपरान्त आरक्षित / अनारक्षित किए गए प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों / निर्वाचन क्षेत्रों की सूची प्रपत्र-3 में जिला स्तर पर जिला गजट में जिला दण्डाधिकारी द्वारा नियम 18 के तहत प्रकाशित की जायेगी. साथ ही इसकी प्रतियाँ ग्राम पंचायत, प्रखण्ड, अनुमंडल एवं जिला दण्डाधिकारी के कार्यालय में भी प्रदर्शित की जाएगी तथा इन सभी जिला गजट की एक-एक प्रतियाँ राज्य निर्वाचन आयोग एवं पंचायती राज विभाग को भी भेजी जाएगी. आयोग का निर्देश है कि आरक्षण एवं आवंटन का प्रस्ताव जिला स्तर पर कैम्प लगाकर जिला दण्डाधिकारी एवं वरीय पदाधिकारियों की देख रेख में समन्वित रूप से तैयार कराया जाए ताकि संबंधित पदाधिकारी / कर्मी बिना किसी राजनैतिक अथवा अन्य वाह्य दबाव के नियमबद्ध आरक्षण एवं आवंटन प्रस्ताव ससमय तैयार कर सकें एवं आयोग स्तर पर सत्यापन के क्रम में त्रुटियाँ पाए जाने की संभावना नहीं हो. आयोग ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण एवं आवंटन का प्रस्ताव तैयार करने में झारखण्ड पंचायत राज अधिनियम, 2001 एवं झारखण्ड पंचायत निर्वाचन नियमावली, 2001 के सुसंगत प्रावधानों का अक्षरशः पालन पूर्ण कड़ाई एवं शुद्धता से किया जाए. अगर किसी पक्षपात अथवा जनगणना के प्रकाशित अंतिम आंकड़ों में छेड़छाड़ कर आरक्षण की स्थिति में परिवर्तित करने की किसी शिकायत की सम्पुष्टि होती है तो आयोग द्वारा इसे अति गंभीरता से लिया जाएगा. सभी संबंधित जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) सह उपायुक्त आयोग द्वारा निर्धारित समय सीमाओं तथा अधिनियम एवं नियमावली के सुसंगत प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे.

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