जमशेदपुर:जमशेदपुर शहर के परशुराम शक्ति सेना ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी किए गए नए समानता और समावेशिता से जुड़े दिशा-निर्देशों पर गंभीर आपत्ति जताई है. परशुराम शक्ति सेना के अभिषेक पाण्डेय के नेतृत्व में इस संबंध में भारत के महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि,प्रस्तावित शिकायत निवारण समितियों के प्रावधान सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों में असुरक्षा और भय का माहौल पैदा कर सकते हैं.सेना का आरोप है कि त्वरित कार्रवाई (फास्ट ट्रैक प्रोसेस) के तहत शिकायतों के निपटारे में प्रारंभिक जांच के लिए कोई स्पष्ट और पारदर्शी मानक तय नहीं किए गए हैं. इससे नियमों के दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है और निर्दोष छात्रों व शिक्षकों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई का खतरा बना रहता है.(नीचे भी पढे)

अभिषेक पाण्डेय ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हो सकता है. साथ ही इससे अकादमिक स्वतंत्रता,अभिव्यक्ति की आजादी और मेधा आधारित शिक्षा प्रणाली पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है. सेना ने मांग की है कि यूजीसी के तहत गठित की जाने वाली शिकायत निवारण समितियां पूरी तरह संतुलित और निष्पक्ष हों. इसके अलावा झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर दंडात्मक कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान किया जाए. द्वि-स्तरीय जांच प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने और सामान्य वर्ग के छात्रों व शिक्षकों को भी समान कानूनी संरक्षण देने की मांग की है. इस अवसर पर परशुराम शक्ति सेना के अभिषेक पांडे, ब्रजेश मिश्रा, सौरभ पाठक, राजा ओझा, डीके मिश्रा, रितेश मिश्रा, गोलू आजाद, दीपक झा, आनंदी ओझा, राजेश पाण्डेय, विनय मिश्रा, कुंदन तिवारी, डीडी शुक्ला, सुधीर मिश्रा, कार्तिक झा, हर्ष सिंह, करण सिंह, सुभम शर्मा, पवन उपाध्याय, अरविंद पाण्डे, चितरंजन ओझा,और काफी संख्या में सवर्ण समाज के सदस्य उपस्थित थे.




