
गालूडीह : नवमी मुहर्रम को जामा मस्जिद गालूडीह में सुबह कुरानख्वानी और बाद जुम्मा नमाज ज़िक्रे शहादत कांफेरेंस का आयोजन किया गया, जिसमें गालूडीह एवं आसपास के सैकड़ो मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए. कारी रिजवान साहब के द्वारा कुरान तिलावत के साथ सम्मेलन की शुरुआत की गयी. मुसाबनी मदरसा के बच्चों द्वारा इमाम हुसैन की शान में खुबशुरत नाथ एवं कशीदे पेश किए गए. गालूडीह के ख़ातिबो इमाम कारी दिलदार हसन सहाब ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत को भुलाया नही जा सकता. (नीचे भी पढ़ें)
कत्ले हुसैन अस्ल में मार्गे यजीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद – कांफ्रेन्स में मुख्य रूप से घाटशिला नवाब कोठी के ख़ातिबो इमाम कारी जियाउद्दीन अमजदी साहब उपस्तिथ हुए थे. उन्होंने अपने तकरीर में बयां करते हुए कहा कि इमाम हुसैन यजीदियों के अत्याचार, अहंकार और 9 लाख के लश्कर से नही डरे और सच्चाई और मुसल्लम ईमान के साथ केवल 72 बहादुर फ़ौजियों के साथ लड़ाई लड़ी और शहीद हो गए. उनके द्वारा कई खूबसूरत नाथ भी पढ़ी गयी. सम्मेलन को घाटशिला फुलपाल मस्जिद के ख़ातिबो इमाम कारी रज्जब अली अमजदी, मौभण्डार के मौलाना रमजान अली, घाटशिला के कारी रिजवान अहमद, हाफिज अरमान साहब आदि ने भी संबोधित किया. सम्मेलन का संचालन हाफिज इश्तेयाक अली ने किया. (नीचे भी पढ़ें)
लंगर-ए-आम- ज़िक्रे शहादत सम्मेलन समाप्त होने के पश्चात तमाम हाजरिनो के लिए लंगर लगाई गयी और शरबत पिलाई गयी. फातेहा नियाज कर शीरनी का वितरण की गयी. गालूडीह मुस्लिम कमेटी के लोगों के द्वारा मुहर्रम की तैयारी कई दिनों से चल रही थी. मस्जिद के सामने कई निशान लगाए गए थे. मौके पर कमेटी के सदर अहमदूस सलाम, सेक्रेटरी सलीम जावेद, केशियर नाजिर खान, संयोजक साजिद अहमद, जावेद अख्तर, सरवर आलम, मोहम्मद जुनैद, मोहम्मद कासिम, जावेद आलन, मो आदिल, मो परवेज, मो नासिर, अली हुसैन, बबलू हुसैन, मो जाहिद, इरशाद हूसैन, जुलु शेख, रमजान शेख एवं कई अन्य मुख्य रूप से शामिल थे.



