जमशेदपुर : बदलते दौर में घरों को सजाने के लिए शहरों में मार्बल स्टाइल पेंटिंग और सिंगल टोन कलर का चलन तेजी से बढ़ रहा है. लोग अपने घरों को आकर्षक लुक देने के लिए महंगे रंगों और डिजाइनर पेंट का सहारा ले रहे हैं. वहीं, जमशेदपुर से सटे गांवों में आज भी घरों को सजाने की सदियों पुरानी परंपरा जीवंत है. यहां महिलाएं किसी पेशेवर पेंटर को बुलाने के बजाय अपने हाथों से दीवारों पर झारखंड की पारंपरिक सोहराय कला उकेर रही हैं. यह कला केवल घरों की सजावट का माध्यम नहीं, बल्कि राज्य की लोकसंस्कृति और परंपरा की पहचान भी है. (नीचे भी पढ़ें)

इसकी खूबसूरत झलक किनूडीह गांव में देखने को मिली. शार्प भारत की टीम जब गांव पहुंची तो कई महिलाएं अपने-अपने घरों की दीवारों को सोहराय पेंटिंग से सजाने में जुटी थीं. खास बात यह है कि यहां महिलाएं केवल अपने घरों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि सामूहिक रूप से एक-दूसरे के घरों को सजाने में भी सहयोग करती हैं. सभी महिलाएं एक साथ बैठकर अपनी कल्पनाओं और पारंपरिक हुनर से दीवारों पर आकर्षक चित्र बनाती हैं. सोहराय कला में प्रकृति और जीव-जंतुओं का विशेष महत्व है. घरों की दीवारों पर कहीं हिरण और हाथी की आकृतियां नजर आती हैं तो कहीं पेड़-पौधे, फूल-पत्तियां और प्राकृतिक दृश्य उकेरे जाते हैं. इन चित्रों की खासियत यह है कि इन्हें बनाने के लिए आधुनिक मशीनों या तकनीक की जरूरत नहीं होती. महिलाएं अपने हाथों और पारंपरिक तरीकों से साधारण मिट्टी की दीवारों को भी खूबसूरत कलाकृतियों में बदल देती हैं. (नीचे भी पढ़ें)

गांव की रहने वाली मुस्कान बताती हैं कि वे हर साल इसी तरह अपने घरों को सजाती हैं. शहरों में लोग पेंटिंग के लिए कारीगर बुलाते हैं, लेकिन उनके गांव में महिलाएं खुद अपने हाथों से दीवारों पर चित्र बनाती हैं. इस दौरान पूरे गांव की महिलाएं एक-दूसरे की मदद करती हैं. इससे आपसी मेलजोल बढ़ता है और त्योहार की खुशियां भी दोगुनी हो जाती हैं. (नीचे भी पढ़ें)
वहीं, रिया बताती हैं कि साल में एक बार घरों की विशेष साफ-सफाई की जाती है. इसके बाद दीवारों पर मिट्टी का लेप लगाकर उन्हें तैयार किया जाता है और फिर सोहराय पेंटिंग बनाई जाती है. इसमें मेहनत जरूर लगती है, लेकिन जब दीवारों पर खूबसूरत आकृतियां उभरती हैं तो घर का पूरा स्वरूप बदल जाता है. अपनी पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने की खुशी अलग ही होती है. किनूडीह की महिलाएं अपनी कला के जरिए यह संदेश दे रही हैं कि घर को खूबसूरत बनाने के लिए महंगे रंगों और डिजाइनर पेंट की जरूरत नहीं, बल्कि हुनर, कल्पनाशीलता और अपनी संस्कृति के प्रति लगाव जरूरी है. आधुनिकता की दौड़ के बीच गांव की मिट्टी की दीवारों पर उभरती सोहराय कला झारखंड की समृद्ध लोकपरंपरा को आज भी जीवंत बनाए हुए है.












