
रांची/नयी दिल्ली : झारखंड में केंद्र सरकार के कोयला ब्लॉक की ऑक्शन की परियोजना के खिलाफ झारखंड सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इसके तहत झारखंड में नौ खानों की नीलामी के संबंध में लाइसेंस, पट्टा, नीलामी समेत अन्य मामले को लेकर अदालत के अंतिम आदेशों के अधीन होगा. इस पर केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसी तरह का कोई पेड़ वहां नहीं काटा जायेगा और खनन भी नहीं होगा. इस बीच किसी तरह का रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार किया है, लेकिन सरकार ने खुद कहा है कि खनन तब तक नहीं होगा जब तक फाइनल फैसला नहीं आ जाता है. आपको बता दें कि झारखंड में कोयला खदानों की नीलामी के खिलाफ झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की बात कहीं गयी है. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले को लेकर पूरे देश के स्तर पर ही फैसला करना चाहता है ताकि कोई भी इको सेंसेटिव जोन या आसपास के 50 किलोमीटर के दायरे में खनन कार्य हो तो क्या गाइडलाइन होना चाहिए. इसके लिए झारखंड में सुप्रीम कोर्ट खुद नीलामी की स्थिति देखने के लिए एक विशेषज्ञ पैनल को भेजने का फैसला ली है. विशेषज्ञ पैनल की रिपोर्ट के बाद ही किसी तरह का कोई फैसला लिया जायेगा. हालांकि, केंद्र सरकार के एटॉर्नी जेनरल ने इसका विरोध किया और कहा कि आर्थिक क्षेत्र से खदानें 20 किलोमीटर की दूरी पर है और पहले से ही यहां उत्खनन का कार्य चल रहा है. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 18 जून को शुरू की गयी 41 कोयला खदानों में से झारखंड में नौ खदानों को नीलामी करने का फैसला लिया था, जिसको झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और कहा हैकि यह जंगलों और आदिवासी संस्कृति और रीति-रिवाजों को नष्ट कर सकता है. ट्राइबल आबादी के लिए यह ठीक नहीं है और पर्यावरण को भी यह नुकसान पहुंचाने वाला फैसला है.














