देवघर: भारत विकास परिषद, देवघर शाखा ने परिषद का 61वां स्थापना दिवस मनाया. स्थापना दिवस कार्यक्रम का प्रारंभ भारत माता, परिषद के ध्येय पुरुष स्वामी विवेकानंद और संस्थापक डॉ सूरज प्रकाश की तस्वीर पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवं वन्दे मातरम् गायन के साथ किया गया. स्थापना दिवस कार्यक्रम उमा नलिनी ब्रह्म सरस्वती विद्या मंदिर, कुंडा, देवघर में आयोजित किया गया. कार्यक्रम के अंतर्गत शाखा द्वारा भारतीय संस्कृति और महान विभूतियों तथा महापुरुषों से संबंधित एक सौ पुस्तकें विद्यालय के पुस्तकालय में बच्चों को पढ़ने के लिए दिया गया. साथ ही विद्यालय परिसर में परिषद सदस्यों एवं विद्यालय के शिक्षकों द्वारा छायादार पौधरोपण भी किया गया.
कार्यक्रम में शाखा के अध्यक्ष आलोक मल्लिक ने परिषद के संस्थापक डॉक्टर सूरज प्रकाश को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनके जुझारू व्यक्तित्व तथा सेवा और समर्पण के बेमिसाल स्मृतियों तथा परिषद के स्थापना के वृत्तांत को बताया.(नीचे भी पढ़े)
1962 में चीन द्वारा अचानक आक्रमण कर भारत पर युद्ध थोप दिया गया. युद्ध में भारतीय सैनिकों का उत्साह बढ़ाने एवं उनकी यथासंभव सहायता करने हेतु डाक्टर सूरज प्रकाश ने एक सिटीजन्स काउन्सिल या ‘जनमंच’ की स्थापना की. सिटीजन कौसिंल ने जनता के बीच जाकर सीमा पर लड़ने वाले सैनिकों के लिये ऊनी वस्त्र, गर्म मोजे, स्वेटर, दवाइयां इत्यादि एकत्र की एवं सरकार को भेजनी प्रारम्भ की. जनमंच को अभूतपूर्व सफलता प्राप्त हुई एवं दिल्ली की जनता ने इसके कार्यक्रमों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. इसके कुछ ही दिनों बाद भारत विकास परिषद् की स्थापना सन् 1963 में हुई थी. यह वर्ष स्वामी विवेकानन्द का जन्म शताब्दी वर्ष भी था. कहा जाता है कि डा. सूरज प्रकाश ने 1962 में चीनी आक्रमण के समय भारतीय सैनिकों की सहायता करने हेतु जिस सिटीजन्स फोरम या जनमंच की स्थापना की थी उसी को 1963 में भारत विकास परिषद् में परिवर्तित कर दिया गया था. किन्तु परिषद् की स्थापना कोई आकस्मिक घटना नहीं थी. इसकी पृष्ठभूमि में एक गहन विचार मंथन एवं देश के सम्पन्न वर्ग की संकीर्ण होती दृष्टि से उत्पन्न वेदना थी. सम्पन्न उच्च मध्यम वर्ग को संगठित करके एक मंच पर लाने की अपनी योजना को डाक्टर साहब ने अपने सहयोगियों के समक्ष रखा जिसे उन सबने सहर्ष स्वीकार किया. इस प्रकार विधिवत् भारत विकास परिषद् की स्थापना हो गई. इसकी प्रथम बैठक कनाट प्लेस स्थित मैरिना होटल में आयोजित की गई, जिसमें कुल 20 सदस्य उपस्थित थे. परिषद को 10 जुलाई 1963 को पंजीयन प्राप्त हुआ और इसी दिन परिषद का स्थापना दिवस मनाया जाने लगा. परिषद् के प्रथम सरंक्षक उच्चतम न्यायालय के सेवा निवृत न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीपी सिन्हा को सौंपा गया. (नीचे भी पढ़े)
लाला हंसराज प्रथम अध्यक्ष बने एवं डॉ सूरज प्रकाश प्रथम राष्ट्रीय महामंत्री. स्वामी विवेकानन्द को परिषद् का पथ प्रदर्शक स्वीकार किया गया.डॉक्टर सूरज प्रकाश व्यस्त और लोकप्रिय चिकित्सक होते हुए समाज सेवा के अनमोल धरोहर थे. आजादी के काल में आतताइयों के आक्रमण और पुनर्वास के दरमियान निर्वासित नागरिकों के सेवा और सहयोग में उनके कार्य बहुत ही प्रभावशाली रहा. वास्तव में यहां पर उन्होंने लोगों को संगठित करने, कम साधनों से काम चलाने एवं अथक परिश्रम करके लक्ष्य को प्राप्त करने का पाठ पढ़ा. यही अनुभव उनके उस भावी जीवन का आधार बना जब उन्होंने एक छोटी सी संस्था भारत विकास परिषद् की नींव रखी एवं उसे एक विशाल वट वृक्ष में बदल दिया. आज पूरे देश में परिषद की 10 प्रक्षेत्र, 77 प्रांत, 1418 शाखाओं में लगभग 67 हजार सदस्य हैं. कार्यक्रम में शाखा के संरक्षक डॉ सुनील सिन्हा, अध्यक्ष आलोक मल्लिक, सचिव एसपी भुईयां बिलास, वित्त सचिव रंजीत वर्णवाल, संगठन सचिव बिपिन मिश्र, कार्यकारिणी सदस्य ई अभय कुमार, ई संतोष सिंह, प्रिंस सिंघल, विद्यालय के प्राचार्य आनंद, विद्यालय के सभी शिक्षक सहित कई सदस्य उपस्थित थे.



