सरायकेला : सरकार और प्रशासन अपनी ओर से बेहतर से बेहतरीन करने के लिए चाहे लाख कवायद कर ले, किन्तु निचले स्तर पर योजनाओं को क्रियान्वित करने वाले वेतनभोगी अक्सर उस पर पानी फेरते नजर आते हैं. इसके कारण अक्सर सरकार या प्रशासन, सभी की बदनामी होती है. कुछ ऐसा ही वाकया बुधवार की रात जिले के सबसे बड़े और सुविधा संपन्न सरायकेला सदर अस्पताल में देखने को मिला जब सड़क दुर्घटना में पैर टूटे एक घायल को लोगों ने सदर अस्पताल पहुंचाया तो वह बेड या स्ट्रेचर मिलने की जगह जमीन पर ही तड़पता हुआ देखा गया. इतने पर डॉक्टर भी नहीं उपलब्ध होने की स्थिति में घायल के साथ आए लोगों ने सहायता के लिए गम्हरिया प्रखंड प्रमुख कयाम हुसैन को फोन कर डाला.
गम्हरिया प्रखंड प्रमुख कियाम हुसैन सूचना पाकर तत्काल रात के तकरीबन 9:00 बजे सदर अस्पताल पहुंचे. जहां उन्होंने डॉक्टर की तलाश शुरू की. तो पाया कि ड्यूटी पर तैनात एकमात्र चिकित्सक हॉस्पिटल के ऊपर के कमरे में आराम फरमा रहे हैं. सड़क दुर्घटना का घायल पेशेंट जमीन पर तड़प रहा है. जिसे देखते हुए उन्होंने ऊपर जाकर डॉक्टर साहब से इलाज के लिए गुहार लगाई. जिसके एक घंटे बाद घायल का इलाज शुरू हो सका. इसके बाद उन्होंने व्यवस्था को लेकर अस्पताल प्रबंधक की खोज प्रारंभ की, तो पता चला कि अस्पताल प्रबंधक संजीत राय अपनी सरकारी खाते की ड्यूटी पूर्वाहन 10:00 बजे से शाम के 5:00 बजे तक बजाकर घर जा चुके हैं. और वे दोबारा नहीं आते हैं. उन्होंने बताया कि अक्सर लोगों की स्वास्थ्य समस्या को लेकर वह सदर अस्पताल तक पहुंचते रहे हैं. जिसे लेकर पूछताछ करने पर जिले के सिविल सर्जन ने भी उनके नंबर को ब्लॉक किया हुआ है. इतना ही नहीं जिले के सबसे बड़े हॉस्पिटल सदर अस्पताल का दर्द भरा पहलू है कि यहां के उपाधीक्षक डॉ नकुल प्रसाद चौधरी एमजीएम जमशेदपुर के भी उपाधीक्षक बने हुए हैं. और मात्र किसी कार्यक्रम या फिर बैठक में भाग लेने के लिए जिले में और सदर अस्पताल में दर्शन देते हैं. इतना ही नहीं, सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ नकुल प्रसाद चौधरी को सुर्खियों में बने रहना पसंद है और आये दिन अखबारों के माध्यम से इनके बयान आते रहते हैं. मैनेज की पद्धति पर डॉ नकुल प्रसाद चौधरी अपने मूल चिकित्सा के पेशे से अलग दो जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के प्रभार में हैं. गम्हरिया प्रखंड प्रमुख कियाम हुसैन में पूरी व्यवस्था पर गहरा दुख प्रकट करते हुए कहा कि जल्द ही सदर अस्पताल की कुव्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री के सचिव को पत्र लिखेंगे. और जिले के उपायुक्त से मिलकर व्यवस्था में सुधार की मांग करेंगे. हालांकि उपायुक्त ने मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सिविल सर्जन को ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को शो काज करने और 1 दिन का वेतन काटने का फरमान जारी किया है.





