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शनिवार, अप्रैल 17, 2021
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    Kolhan-University : अखिल झारखंड छात्र संघ का सवाल-चांसलर पोर्टल के माध्यम से कितने विद्यार्थियों ने लिया एडमिशन, महामारी काल में रुका छात्रों का पलायन, फिर भी वोकेशन पाठ्यक्रमों में क्यों नहीं बढ़ा नामांकन, सीटें अब भी खाली क्यों

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    जमशेदपुर : अखिल झारखंड छात्र संघ के कोल्हान अध्यक्ष हेमन्त पाठक के नेतृत्व में कोल्हान यूनिवर्सिटी के शाखा कार्यालय में कुलपति के नाम से डॉ आर के चौधरी को एक ज्ञापन सौप।हेमन्त पाठक ने कहा कि कोल्हान यूनिवर्सिटी के सारे पदाधिकारी हवा-हवाई कार्य कर रहे हैं। उनके जेहन में छात्रों के भविष्य से जुड़े प्लान नहीं हैं। सिर्फ कागज पर ही इनको विकास करना है, धरातल पे इनका कोई कार्य नहीं है। कुलपति से छात्र आजसू निम्न जानकारी चाहता है और आग्रह करता है 48 घंटे के अंदर मीडिया के माध्यम से ही निम्न सवालों के जवाब छात्रों को दिये जायें, ताकि कोल्हान विश्वविद्यालय की भविष्य की योजना की जानकारी छात्रों को हो। (आगे की खबर नीचे पढ़ें)

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    छात्र आजसू द्वारा किये गये सवाल

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    • अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार 55-57% नामांकन ही डिग्री( कला, वाणिज्य एंव विज्ञान) विषयों मे सत्र 2020-2023 के लिए हुए है। अथवा इस विषय पर अबतक विश्वविद्यालय ने क्या कार्रवाई की है।
    • चांसलर पोर्टल के माध्यम से जो आवेदन हुए तथा जिन अभ्यर्थियों को नामांकन हेतु चयनित किया गया उनमें से कितने अभ्यर्थियों ने संबंधित महाविद्यालयों में नामांकन ही नहीं लिया, क्यो? क्या विश्वविद्यालय यह बता सकता है कि नामांकन नहीं लेने के कारण विभिन्न महाविद्यालयों मे कुल कितने सीटे खाली रह गई हैं?
    • हजारों की संख्या मे कोल्हान क्षेत्र के छात्र वोकेशनल तथा अन्य कोर्स की पढाई के लिए दूसरे राज्यों को पलायन करते थे, लेकिन इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण ज्यादातर छात्र दूसरे शहर नहीं जा सके हैं. इस कारण छात्रों कि संख्या में बढ़ोतरी हुई है. इस तरह विश्वविद्यालय के महाविद्यालयों मे वोकेशनल कोर्स में नामांकन मे वृद्धि होनी चाहिए, परन्तु वृद्धि तो छोड़िए इस सत्र का नामांकन पिछले वर्ष की तुलना मे कम ही हुआ है। लगभग महाविद्यालयों में वोकेशनल पाठ्यक्रमों में एडमिशन की स्थिति चिंताजनक है और विश्वविद्यालय प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ हैं। इस विषय पर अब विश्वविद्यालय के द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं अथवा भविष्य में इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
    • इस साल जितने भी अंगीभूत / संबद्धता प्राप्त कॉलेज में प्लेसमेंट सेल के माध्यम से (वीमेंस कॉलेज को छोड़कर) कैंपस सलेक्शन नहीं करवाया गया। कोरोना संक्रमण काल की बात करें, तो प्राइवेट कॉलेजों में भले ही सलेक्शन कम हुए हैं, परंतु हुए तो है बाकी किसी भी कॉलेजो में प्लेसमेंट सेल इतना निष्क्रिय है। इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों के साथ बैठक क्यों नही की गयी है। अगर बैठक हुई है तो अभी तक एक भी केम्पस सलेशन क्यो नहीं हुआ है? इस कोरोना काल मे भी दूसरे यूनिवर्सिटी के अंतर्गत कैंपस सलेक्शन भले ही थोड़ा कम हुआ है, लेकिन प्रक्रिया सम्पन्न तो जरूर हुई है।
    • नामांकन की प्रक्रिया को इतना लेंदी बना दिया गया है कि छात्रों को समझ ही नहीं आ रहा है कि कैसे नामंकन होगा, तो क्या यूनिवर्सिटी गांव देहात, सुदूर क्षेत्र के छात्रों के लिए ऑफलाइन नामांकन की व्यवस्था होगी या नहीं होगी, विश्वविद्यालय यह भी स्पष्ट करे? (आगे की खबर नीचे पढ़ें)

    छात्र आजसू की ओर से कहा गया है कि जब विश्वविद्यालय में छात्रहित में कोई कार्य ही नहीं होगा, छात्र ही नही होंगे तो फिर पदाधिकारियों ओर छात्र संघ की आवश्यकता ही क्या रह जायेगी? इस विषय पर विश्वविद्यालय अपना रुख स्पष्ट करें। अन्यथा छात्र आजसू सड़क पर उतर कर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा और इस विषय को विधानसभा सत्र में भी उठाया जाएगा। क्योंकि यह सारे विषय छात्रहित से जुड़े हुए हैं और छात्रों के भविष्य से खेलने नहीं दिया जाएगा। इस दौरान छात्र आजसू के कोल्हान उपाध्यक्ष रंजन दास, राजेश महतो, साहेब बागती, पंकज गिरि, उत्तम कुमार, मुन्ना कुमार समेत अन्य उपस्थित थे।

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