जमशेदपुर : काला घोड़ा आर्ट्स एसोसिएशन (केजीएए) और संवाद के संयुक्त तत्वावधान में 26वें काला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल के दौरान उनकी सतत साझेदारी का तीसरा संस्करण प्रस्तुत किया जा रहा है. यह आयोजन मुंबई के हृदयस्थली में भारत की समृद्ध जनजातीय कला, संगीत और पारंपरिक ज्ञान परंपराओं का जीवंत उत्सव होगा. इस वर्ष के सहयोग का एक प्रमुख आकर्षण सौरा, सोहराय, जादुपटिया और पैतकार जैसी पारंपरिक कला शैलियों से प्रेरित 50 हस्तनिर्मित लैम्पशेड्स की एक प्रभावशाली स्थापना है. ये प्रकाशमान कलाकृतियां रैम्पार्ट रो और हॉर्निमन सर्कल गार्डन्स में प्रदर्शित की जाएंगी, जो नौ दिनों तक समारोह के आकाशीय दृश्य को एक नया रूप देंगी. यह स्थापना तीन प्रतिष्ठित आदिवासी कलाकारों, हो जनजाति के दीनबंधु सोरेन, भूमिज जनजाति की लखिमोनी सरदार और संथाल जनजाति की सुनीता हेम्ब्रम द्वारा सृजित की जा रही है, जो प्रकाश और कलाकृतियों के माध्यम से कथाओं, प्रतीकों और पूर्वजों की सौंदर्य परंपराओं को एक साथ प्रस्तुत करेगी. (नीचे भी पढ़ें)

पूरे समारोह के दौरान पूर्वी भारत के विभिन्न हिस्सों से आए आदिवासी शिल्पकार और सामाजिक परिवर्तनकर्ता शहरी दर्शकों से संवाद स्थापित करेंगे, जिससे जनजातीय कला रूपों, शिल्प, संगीत और संस्कृति पर सार्थक चर्चा को बढ़ावा मिलेगा. 31 जनवरी से 4 फरवरी तक पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के पांच शिल्प समूह सौरा, सोहराय और पैतकार कला के साथ तसर रेशम बुनाई तथा प्राकृतिक बीजों और खजूर से बने आभूषणों जैसे पारंपरिक शिल्पों का प्रदर्शन करेंगे. इसके बाद अगले चार दिनों में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के अन्य शिल्प समूह डोकरा धातु शिल्प, बीड्स से बने आभूषणों तथा जनजातीय प्रतीकों, शब्दों और कथाओं को रचनात्मक रूप से समाहित करते हुए टी-शर्ट और टोट बैग जैसे समकालीन उत्पाद प्रस्तुत करेंगे. इस सहयोग को संगीत का आयाम देते हुए संवाद की संगीत टोली ‘रिद्म्स ऑफ द अर्थ’ 5 और 6 फरवरी को प्रस्तुति देगी. (नीचे भी पढ़ें)
दिसंबर 2025 में हॉर्नबिल फेस्टिवल में मिली जबरदस्त सराहना के बाद, संवाद के पहले और दूसरे एल्बम के कलाकारों से सजी यह टोली पारंपरिक वाद्ययंत्रों, लोक गीतों और जीवन के अनुभवों से सजे संगीत के माध्यम से शहरी दर्शकों से एक बार फिर जुड़ाव स्थापित करेगी. एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण “कॉन्वर्सेशन्स विद दोज़ हू अंडरस्टैंड द अर्थ बेस्ट” शीर्षक नामक एक पैनल चर्चा होगी, जिसका आयोजन 1 फरवरी को काला घोड़ा के सामने स्थित डेविड ससून लाइब्रेरी में किया जाएगा. इस चर्चा में प्रमुख आदिवासी विचारक और विचार एक मंच पर आएंगी, जिनमें जलवायु-सहिष्णु समाधानों की प्रखर पैरोकार और इंडिया टुडे के जलवायु परिवर्तन मंच की प्रतिभागी मालती माझी, शहरी प्रशासन, बाल कल्याण और सांस्कृतिक दस्तावेज़ीकरण के क्षेत्र में अपने कार्यों के लिए जाने जाने वाले मनोज कुजूर, तथा पारंपरिक लेप्चा लोक संगीत के संरक्षण और पुनर्जीवन में सक्रिय किंगचुम लेप्चा शामिल होंगे. काला घोड़ा आर्ट्स एसोसिएशन और संवाद, मुंबई में आयोजित 26वें काला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल में कला, शिल्प, संगीत और स्वदेशी ज्ञान के इस अद्भुत संगम का अनुभव करने के लिए दर्शकों को आमंत्रित करते हैं.








