
जमशेदपुर : झारखंड सरकार द्वारा जुलाई माह में खनिज पर अतिरिक्त कोविड सेस लगाये जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दरअसल, एजुकेशन सेस और अन्य तरह के सेस के खिलाफ पहले से ही टाटा स्टील सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है. यह मामला अब तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. इस बीच झारखंड सरकार ने नया कोविड सेस लगा दिया. पुराने केस में ही टाटा स्टील ने इसको जोड़ते हुए कोविड सेस को भी चुनौती दी है. झारखंड सरकार ने जुलाई माह में सभी तरह के खनिज उत्पादन करने वाली कंपनियों पर कोरोना को देखते हुए अतिरिक्त कोविड सेस लगा दिया है. झारखंड सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, कोरोना के दौरान प्रवासी मजदूरों के पुर्नवास, संसाधनों के निर्माण, गांव और घरों को उद्योगों के आसपास बनवाने, एमएसएमइ को बनाने और रोजगार को बचाने के लिए जरूरी है कि इस कोरना के महामारी में अतिरिक्त राशि को जुटा जाये. इसके तहत झारखंड के तमाम खनिज संपदा को देखते हुए कोविड सेस लगाया जा रहा है. झारखंड सरकार ने झारखंड मिनरल बियरिंग लैंड सेस ऑर्डिनेंस 2020 लाया है. इसके तहत दस रुपये प्रति मीट्रिक टन कोयला के उत्पादन पर कंपनियों को देना होगा. इसके अलावा आयरन ओर पर पांच रुपये प्रति मीट्रिक टन, बाक्साइट पर 20 रुपये, लाइम स्टोन पर 10 रुपये और मैगनीज पर पांच रुपये प्रति मीट्रिक टन के हिसाब से कंपनियों को अतिरिक्त सेस देना होगा. वैसे आपको बता दें कि टाटा स्टील कोयला, आयरन ओर, लाइम स्टोन और मैगनीज जैसे तमाम चीजों का इस्तेमाल स्टील बनाने में करती है, जिस कारण यह अतिरिक्त बोझ कंपनी पर लाद दिया गया है, जिसके खिलाफ टाटा स्टील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. यह कहा गया है कि कोरोना के कारण टाटा स्टील के भी आर्थिक पक्ष पर असर पड़ा है. पहले से ही टैक्स कोविड काल के दौरान कंपनी देती रही है, सीएसआर के तहत काम करती रही है. झारखंड सरकार को अतिरिक्त मदद के साथ ही देश के स्तर पर भी मदद की है. ऊपर से कोविड सेस लगाना जायज नहीं है. अभी सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई होनी बाकि है. वैसे टाटा स्टील अब तक सेस दे रही है.












