
जमशेदपुर : बेरमो क्षेत्र के विधायक सह पूर्व उपमुख्यमंत्री रह चुके राजेंद्र सिंह (राजेंद्र बाबू) के सुपुत्र अनूप सिंह को लगातार मिल रहे झटके पर झटके से उनके समर्थकों में मायूसी है. टाटा कमिन्स यूनियन से प्रबंधन द्वारा बाहर का रास्ता दिखाने के बाद झारखण्ड इंटक में अध्यक्ष पद पर राकेश्वर पांडेय से मिली पटखनी के बाद समर्थक बैकफुट पर हैं. इंटक के राष्ट्रीय महामंत्री रह चुके पूर्व उपमुख्यमंत्री राजेंद्र सिंह के निधन के पश्चात उनके पुत्र अनूप सिंह विधायक तो बन गए पर इंटक में अपनी पकड़ नही बना पा रही है. मजदूर राजनीति से वे लगभग दूर होते जा रहे है. धनबाद और बोकारो और बेरमो की बात को अगर छोड़ दी जाये तो राष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी पकड़ कम हुई है और जमशेदपुर के समर्थक को एकदम मायूस ही हो चुके है.
टाटा कमिन्स
इंटक के राष्ट्रीय महामंत्री और पूर्व उपमुख्यमंत्री राजेंद्र सिंह के निधन के पश्चात यूनियन की टीम ने अनूप सिंह को उनके स्थान पर अध्यक्ष मनोनित कर दिया था. यूनियन के महामंत्री अरुण सिंह की बर्खास्तगी के मुद्दे पर जिस तरह से अनूप सिंह ने एक तरह से प्रबंधन को चैलेंज कर दिया, उससे पूरा खेल ही बिगड़ गया. इंटक की राजनीति में प्रबंधन के फैसले के खिलाफ नही बोलना सबसे पहली डिप्लोमेसी है, जिसमे वे चूक गए. यूनियन के लोगों और कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग का समर्थन रहते हुए भी वहां चुनाव हुआ और नयी कमेटी से अनूप सिंह बाहर हो गए.
झारखंड इंटक
राजेन्द्र सिंह के निधन के एक सप्ताह के भीतर ही जिस तरीके से जमशेदपुर के उनके ही महामंत्री राकेश्वर पांडेय ने एडहॉक अध्यक्ष पद पर अपनी ताजपोशी करवा ली, उसके खिलाफ अनूप सिंह ने खुलेआम बगावत की. फेसबुक लाइव के माध्यम से इस मनोनयन का विरोध किया. समर्थकों में सन्देश दिया कि विधानसभा चुनाव के बाद इसका समाधान हो जाएगा और चुनाव से ही अध्यक्ष का चयन होगा. झारखंड इंटक की कार्यकारिणी की बैठक में जिस तरीके से अपनी बात को रखा उससे भी लग रहा था, शायद परिणाम कुछ और हो जायेगी, लेकिन दिल्ली में राष्ट्रीय इंटक की कार्यकारिणी की बैठक के बाद राकेश्वर पांडेय अपनी अध्यक्षी को बरकरार रखने में कामयाब हो गए यह अनूप सिंह के लिए बड़ा झटका है.
उद्धव ठाकरे जैसा न हो जाये हाल
महाराष्ट्र में जिस बाला साहब ठाकरे के सामने लोग कुछ बोलने से डरते थे. आज उनके पुत्र उद्धव ठाकरे की स्थिति सबके सामने है. वैसे ही इंटक और झारखंड में राजेंद्र सिंह की स्थिति थी पर अनूप सिंह को लगातार मिले दो झटके ने उन्हें और उनके समर्थकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. वैसे जमशेदपुर में उनके शुभचिंतको में चन्द्रभान सिंह, विजय खां, परितोष सिंह, संजीव सिंह समेत टाटा वर्कर्स यूनियन और टाटा मोटर्स यूनियन में काफी लोग शामिल है, जो अब भी उनके साथ ही है, लेकिन लगातार इंटक में मिल रहे झटके से सबमें मायूसी है.













