
जमशेदपुर : टाटा वर्कर्स यूनियन में जमा कर्मचारियों के पैसों से लाखों रुपये सामाजिक कार्य के नाम पर खर्च करने का चौतरफा विरोध शुरू हो गया है. इसको लेकर टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद और महामंत्री सतीश सिंह के पास पत्र भेजकर कमेटी मेंबरों ने अपना विरोध दर्ज करा दिया है. कमेटी मेंबर सरोज कुमार सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि यह जानकारी मीडिया से मिली है कि निबंधित संविधान के आर्टिकल 8 के जेनरल फंड में इसके संचित कोष के इसके सदस्यों के कल्याण हेतु खर्च करने की प्रक्रिया स्पष्ट अंकित है, जिसके दायरे में 50 लाख किसी कार्य के लिए खर्च करना नहीं आता है, इस कारण इसको नहीं करने की अपील की गयी है. इसके अलावा कमेटी मेंबर सुभाष ने महामंत्री को दिये गये पत्र में कहा गया है कि उनको शार्प भारत के न्यूज से यह जानकारी मिली है कि टाटा वर्कर्स यूनियन कर्मचारियों के पैसे का इस्तेमाल करने जा रही है और इसका बंदरबांट होने जा रहा है. इसको तत्काल रोकने की मांग करते हुए सुभाष ने कहा है कि यह गैर संवैधानिक है क्योंकि संविधान इसकी कोई इजाजत नहीं देता है कि कोई भी कार्य में इसके फंड का इस्तेमाल कर दिया जाये. इसके फंड का इस्तेमाल टाटा स्टील के मजदूरों के हितों पर ही खर्च किया जाना है. इसी तरह कमेटी मेंबर संतोष सिंह ने अध्यक्ष को लिखे गये पत्र में कहा है कि कर्मचारियों ने अपने वेतन से एक दिन का सैलेरी दे दिये है. इस सैलेरी का हिस्सा देने के बाद मजदूरों के ही चंदा से खड़ा किया गया फंड की राशि एक बार फिर से यूनियन द्वारा खर्च किया जाना नाजायज है और इसको हर हाल में रोका जाना चाहिए. आपको बता दें कि टाटा वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को यह फैसला लिया था कि यूनियन के फंड से कोरोना वायरस के कारण प्रभावितों की मदद की जायेगी. इसके लिए राशि तय नहीं हुई थी जबकि यह तय किया गया था कि खर्च किया जायेगा. कितना खर्च किया जायेगा और किस मद में खर्च किया जायेगा यह तय नहीं हो पाया था. यह भी कहा गया था कि टाटा स्टील फाउंडेशन के माध्यम से ही इसको खर्च किया जायेगा. लेकिन अब नया पेंच आने से यूनियन के अध्यक्ष, महामंत्री और डिप्टी प्रेसिडेंट की मुश्किलें बढ़ गयी है.












