
जमशेदपुर/रांची : झारखंड की राजधानी रांची के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स यानी राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान से कोरोना वायरस के कई संदिग्ध मरीज भाग गये है. इसको लेकर हड़कंप मच गया है. बताया जाता है कि वे सारे मरीजों में 90 फीसदी कोरोना वायरस का लक्षण पाया गया था, जिसकी पहचान के लिए अभी टेस्ट चल ही रहा था कि वे लोग भाग निकले. इसको लेकर सरकार और प्रशासन सकते में आ गयी है. इस तरह के मरीज कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या बढ़ा सकते है और लोगों में इस तरह के वायरस को फैला सकते है. यहीं वजह है कि इसको लेकर काफी ज्यादा हड़कंप की स्थिति है. ये सारे मरीज पश्चिम सिंहभूम जिले, रांची, रामगढ़, हजारीबाग, गिरीडीह, चतरा और गुमला के मरीज है. इस बारे में रिम्स के निदेशक डॉ डीके सिंह ने बताया कि ये सारे लोग ऐसे है, जो संदिग्ध है. इनको आइसोलेशन सेंटर में ही रहना था, लेकिन वे लोग भाग गये है. उनसे खतरा तो है. अगर वे लोग नहीं लौटे तो मामले में एफआइआर तक दायर होगा, जैसा उत्तर प्रदेश सरकार ने आगरा में कर चुकी है. जब तक पूरी चेकिंग नहीं हो जाये और नेगेटिव रिपोर्ट नहीं आये, तब तक संदिग्ध मरीजों को कभी भी अस्पताल नहीं छोड़ना चाहिए.
दूसरी ओर, जमशेदपुर के एक होटल में इटली के दो नागरिकों को मंगलवार की रात को पकड़ा गया था. उनकी जांच पूरी हो गयी है और उनमें कोरोना वायरस नहीं पाया गया है. उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आयी है यानी कोरोना वायरस का कोई इफेक्ट उन लोगों के ऊपर नहीं है. बताया जाता है कि ये दोनों नागरिक इटली के है और जमशेदपुर के सोनारी की एक लड़की से शादी करने के लिए आये है. वे लोग जनवरी से ही भारत में है. दूसरी ओर, एमजीएम मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे चार विदेशी छात्रों को उनका देश लौटा दिया गया है. हॉस्टल को भी खाली कराया जा चुका है. एमजीएम मेडिकल कॉलेज में 2016 बैच में बांग्लादेश और नेपाल के दो छात्र है, जिनके नाम फरजाना इस्लाम सुंगधा रानी गुप्ता है, जिनको वापस भेज दिया गया है. इसके अलावा 2017 बैच की पूजा यादव और स्निग्धा है, जो विदेश से आयी है, इनको भी वापस भेज दिया गया है. डीसी रविशंकर शुक्ला ने बताया कि खतरे की बात नहीं है. दोनों में कोरोना के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं , फिर भी वे लोग देश के कई इलाकों का भ्रमण कर आए हैं, एहतियातन उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं. डीसी ने कहा कि इन मामलों में मानवीयता के साथ साथ संवेदनशीलता दिखाते हुए जागरूक रहना है न कि किसी को अपराधी नहीं समझना है.














