
संतोष वर्मा
चाईबासा : चक्रधरपुर रेल मंडल माल ढुलाई से सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित करने का दम भरता है. लेकिन इसी रेल मंडल की सरकारी सुरक्षा एजेंसी आरपीएफ पर चोरी और अपराध को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लग रहा है. मामला चक्रधरपुर रेल मंडल के विभिन्न साइडिंग में कोयला चोरी से जुड़ा हुआ है. चक्रधरपुर रेल मंडल का बंडामुंडा सेक्शन कोयला माफिया और कोयला चोरी का हब बन चुका है. यहाँ की ज्यादातर साइडिंग में वैगनों से खुलेआम दिन-दहाड़े बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी हो रही हैं. बंडामुंडा सेक्शन में कोयला चोरी कोई नयी बात नहीं है, लेकिन पिछले छह-सात महीने में कोयला चोरी का यह गोरख धंधा तेजी से बढ़ा है. कुछ दिन पहले कोयला चोरी के मामले में एक आरपीएफ एएसआई सस्पेंड भी हो चुका है, जबकि इस धंधे में कोयला माफियाओं से सांठगांठ करने वाले बड़े अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही. साइडिंग पर जहां नजर दौड़ायें, वहां कोयले का ढेर नजर आएगा. यह सभी कोयला का ढेर कोयला माफियाओं ने रेलवे के वैगन से चुराकर जमा किया है. इसे अच्छी खासी बड़ी रकम लेकर कोयला माफिया बेचते हैं. यानी पूंजी कुछ लगाना नहीं. बस कोयला लदी माल गाड़ियों के वैगन से कोयला चोरी करो और बेच दो. जिन्हें रेल संपत्ति की सुरक्षा का जिम्मा मिला है, वो आरपीएफ आपको दूर दूर तक नजर नहीं आएगा. (आगे की खबर नीचे पढ़ें)

कैसे होता है कोयला का यह काला कारोबार
जानकारी के मुताबिक बंडामुंडा सेक्शन में रोजाना 4 कोयले के रैक का अवागमन होता है. खासकर राउरकेला स्टील प्लांट में घुसे कोयले के रैक को मशीन द्वारा खाली कराया जाता है. लेकिन रैक को पूरी तरह खाली नहीं करवाया जाता है. प्रत्येक रैक में 40 से 60 बोरा कोयला रह जाता है. कोयले के इस रैक को साइडिंग में लगाकर आरपीएफ की देखरेख में साफ़ करने का नियम है. लेकिन यह काम कोयला माफियाओं को दे दिया जाता है. कोयला माफिया चंद रूपये का लालच देकर ग्रामीणों से रैक की सफाई करवाते हैं. उसके बाद कोयला का बड़ा ढेर इकठ्ठा कर इसे बेच दिया जाता है. हर हफ्ते 10-12 डंपर रेलवे के वैगनों से चुराकर कोयला माफिया पार कर देते हैं. वेदव्यास में चोरी के कोयला का भण्डारण होता है. वहां से इन चोरी के कोयला की बड़ी-बड़ी खेप को छोटे-छोटे स्पंज आयरन फेक्टरियों को आपूर्ति की जाती है. जिसमें बिना पूंजी लगाए कोयला माफियाओं को लाखों का मुनाफा होता है. आरएसपी, चांदीपोस, बिमलगढ़, रेंजड़ा, पाटासाई और करमपदा में कोयला यह यह काला कारोबार तेज है. लेकिन इन सब में से बिमलगढ़, रेंजड़ा, पाटासाई में कोयला माफियाओं को लूट की पूरी छूट मिली हुई है. (आगे की खबर नीचे पढ़ें)

आरपीएफ की शह पर कोयला कारोबार, ग्रामीण परेशान
कोयला के इस काले कारोबार को रोकने का जिम्मा जिस आरपीएफ को है वह आरपीएफ कोयला चोरी रोकने के मामले में फिसड्डी साबित हो रहा है. आरपीएफ का खाकी यहाँ कोयले के काले धब्बे से दागदार है. बताया जाता है कि कोयला माफियों को आरपीएफ का पूरा संरक्षण है. आरपीएफ की शह पर कोयले की चोरी हो रही है. जिस आरपीएफ पर ऐसी घटनाओं को रोकने की बड़ी जिम्मेदारी है, वह आरपीएफ खुद कोयला माफियाओं के साथ मिलकर कोयला चोरी करवाता है और चोरी के माल का बराबर का हिस्सेदार बन जाता है. यह हम नहीं बल्कि इलाके के लोग और कोयला माफिया इस बात को बताते हैं. ग्रामीणों का कहना है की आरपीएफ ने कोयला माफियाओं को ढील दे राखी है. जिस कारण कोयले की तो चोरी होती ही है इलाके में अपराध का भी माहौल बन गया है. कोयले के कारोबार में बिना पूंजी के लाखों कमाने की चाहत में हर रोज एक नया कोयला माफिया उठ खड़ा होता है. जिससे इलाके में वर्चस्व की भी लड़ाई शुरू होने लगी है. कोयला माफियाओं के वर्चस्व की लड़ाई में गांव का सुख, शांति, अमन-चैन खोने लगा है. (आगे की खबर नीचे पढ़ें)

सीनियर डीसीएम ने माना, बंडामुंडा में हो रही है कोयला चोरी की घटना, इसकी रोकथाम के लिए प्लान हो रहा तैयार
इस मामले में चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम मनीष कुमार पाठक ने माना की बंडामुंडा के कुछ जगहों पर वैगनों से कोयला चोरी की सूचना मिल रही है. साइडिंग व अन्य इलाकों से कोयला चोरी की घटना की रोकथाम के लिए चक्रधरपुर रेल मंडल एक प्लान बना रहा है. इसके तहत कोयला चोरी की सारी जानकारी इकठ्ठा कर इसकी रोकथाम को लेकर एक कार्य योजना तैयार की जा रही है. इस मामले में आरपीएफ को भी सचेत रहने को कहा गया है. वहीं वैगनों को पूरी तरह से साफ़ कर खली करने का निर्देश भी जारी किया गया है. आरपीएफ को जारी निर्देश में कोयला चोरी में संलिप्त लोगों की धर-पकड़ तेज कर उन पर सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है.













