
जमशेदपुर : संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के अनुसार दुनिया की लगभग 7000 भाषाओं में से 40 फीसदी भाषाएं जल्द विलुप्त होने वाली हैं क्योंकि उनका उपयोग पठन-पाठन, सरकारी कार्य, व्यवसाय, संचार-संवाद आदि में प्रयोग नहीं होता है. विलुप्ति की कगार पर लगभग सभी आदिवासी भाषाएं हैं. ऐसी अवस्था में भारत की एकमात्र सर्वाधिक बड़ी आदिवासी भाषा-संताली, जो राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त (आठवीं अनुसूची में शामिल) है, को संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत झारखंड की प्रथम राजभाषा का दर्जा नहीं देना झारखंड के हेमंत सरकार की आदिवासी भाषा विरोधी मानसिकता का परिचायक है. इस कारण सेंगेल भारत के 5 प्रदेशों (झारखंड-बंगाल-बिहार-ओड़िशा-असम) में 7 जनवरी 2022 को हेमंत सरकार का पुतला दहन कर सरकार और जनता को जागरूक करना चाहती है. सेंगेल ने 3 जनवरी 2022 को संध्या 252 सदस्यों की वर्चुअल मीटिंग के माध्यम से 5 प्रदेशों में हेमंत सरकार के पुतला दहन का फैसला लिया है. यह जानकारी पूर्व सांसद और राष्ट्रीय अध्यक्ष सेंगेल सालखन मुर्मू ने दी. ज्ञातव्य हो कि पूर्व सांसद सलखन मुर्मू के नेतृत्व में “संताली भाषा मोर्चा” के बैनर तले सैकड़ों संगठनों के साथ लंबे आंदोलन और संघर्ष के बाद भाजपा और कांग्रेस के सहयोग से संताली भाषा को 22 दिसंबर 2003 को लोकसभा में पारित कराया गया है. तत्पश्चात सालखन मुर्मू तब सांसद ने सर्वप्रथम संताली भाषा में लोकसभा में अपना वक्तव्य भी प्रदान किया था. परिस्थिति ठीक रहा तो सेंगेल, संताली राजभाषा और सरना धर्म कोड की मान्यता हेतु अप्रैल 2022 में रांची चलो और जून 2022 में दिल्ली चलो का जोरदार कार्यक्रम कर सकता है, जिसमें सेंगेल अन्य संगठनों के सहयोग की कामना भी करता है.












