अनिल कुमार / बोकारो : युवतियों एवं महिलाओं की सुरक्षा आज बड़ी चुनौतियों में से एक है. खास कर बेटियों के घर से निकलने के बाद उनके वापस घर लौटने तक माता-पिता को चिंता बनी रहती है. बढ़ते अपराध और सामाजिक रूप से बढ़ती असुरक्षा के माहौल में खास कर पढ़ाई के लिए बाहर निकलनेवाले छात्राओं के परिजनों को इसे लेकर अधिक सतर्क रहना पड़ता है. इसे लेकर परिवार और पुलिस के स्तर पर सुरक्षा के उपाय तो किये ही जाते हैं, किन्तु वे कहीं न कहीं नाकाफी साबित हो रहे हैं. इसीलिए अब इसके लिए तकनीकों का सहारा लिया जाने लगा है. तकनीक की मदद से ही डीपीएस बोकारो की मेधावी छात्रा अंजलि शर्मा ने अनूठा सुरक्षा उपकरण तैयार किया है. अंजलि ने एक ऐसी खास घड़ी बनाई है, जिसे उसने गर्ल्स सेफ्टी ऑटोमेटिक कॉलिंग वॉच का नाम दिया है. इस घड़ी की मदद से मुश्किल में फंसीं महिला या लड़की बस एक बटन दबाकर अपनी हिफाजत कर सकेगी. घड़ी का बटन दबाते ही सीधे उसके परिजन व पुलिस को फोन चला जाएगा. फोन के साथ-साथ खतरे में होने का एसएमएस भी उन्हें जायेगा. घड़ी में लगे जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) की मदद से परिजन या पुलिस मिनटों में सीधे उसके पास पहुंच सकेंगे. इस उपकरण के निर्माण के लिए अंजलि का भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से इंस्पायर अवार्ड योजना के तहत चयन भी हो चुका है. प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए प्राथमिक स्तर पर उसे 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिल चुकी है. (नीचे भी पढ़ें)
ऐसे काम करती है सेफ्टी कॉलिंग वॉच

एमसीयू (माइक्रोकंट्रोलर यूनिट) आधारित इस वॉच में सेंसर, दो पुश बटन, एलसीडी स्क्रीन, एलईडी ग्लो, वाई-फाई युक्त जीएसएम (ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशन) मॉड्यूल, सिम-कार्ड आदि की जरूरत होती है. एक एम्बेडेड सिस्टम में एमसीयू मुख्य घटक है जो सर्किट बनाता है. इसमें एक प्रोसेसर इकाई, मेमोरी मॉड्यूल और कम्युनिकेशन इंटरफेस लगा होता है. एमसीयू में लगी चिप में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की मदद से वो नंबर फीड किये जा सकते हैं, जिन पर फोन किया जाना है. आपातकाल में घड़ी में लगे बटन को दबाते ही सेंसर काम करने लगता है, जो माइक्रोकंट्रोलर को सूचित करता है. उसमें लगे सिम के जरिए सीधे कन्फिगर किए मोबाइल नंबर पर फोन चला जाता है. एक स्विच से घर, तो दूसरे से पुलिस को फोन भेजा जा सकता है. एलईडी ग्लो वाले सेंसर से कॉल कनेक्ट होने का पता चलता है, जबकि इंटरनेट की मदद से जीपीएस के जरिए फोन रिसीव करने वाले के फोन में उसका लोकेशन भी पहुंच जाता है. (नीचे भी पढ़ें)
सफर में मां के साथ हुई घटना से आया आइडिया
डीपीएस बोकारो की 9वीं कक्षा की छात्रा अंजलि ने बताया कि एक बार उसकी मां राखी गौरव बस से कहीं जा रही थीं. इसी बीच उनके साथ कुछ बदमाशों ने उन्हें परेशान करने का प्रयास किया. उस वक्त कोई भी सहयात्री उनकी मदद को आगे नहीं आया. किसी प्रकार पुलिस को सूचित किया गया, तब मदद मिल सकी. इस घटना ने ही उसे यह सेफ्टी कॉलिंग वॉच बनाने को प्रेरित किया. (नीचे भी पढ़ें)
आइएएस अधिकारी बनना चाहती है अंजलि
बोकारो स्टील प्लांट के अधिकारी अनंत कुमार गौरव और शिक्षिका राखी गौरव की होनहार पुत्री अंजलि की दिली ख्वाहिश आगे चलकर आइटी में इंजीनियरिंग के बाद एक आइएएस अधिकारी बनना है. उसे रोबोटिक्स में काम करने का अनुभव रहा है. फिलहाल लगभग दो हजार रुपए खर्च पर उसने ऑनलाइन सामान जुगाड़ किए और सेफ्टी ऑटोमेटिक कॉलिंग वॉच बना डाला. आगे इसके नैनो स्वरूप में संवर्धन के लिए अधिक खर्च आयेगा.











