जमशेदपुर : जमशेदपुर स्थित करीम सिटी कॉलेज में बुधवार को कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में किसानों की भूमिका विषय पर दो दिवसीय सेमिनार आरंभ हुआ. करीम सिटी कॉलेज के वाणिज्य विभाग व नबार्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सेमिनार के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेश बैस ने अन्य सम्मानित अतिथियों के साथ सेमिनार का विधिवत उद्घाटन किया. सेमिनार को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कृषि एवं ग्रामीण विकास के विविध पहलुओं की चर्चा करते हुए याद दिलाया कि पहले हमारे गांव आत्मनिर्भर थे. ग्रामीणों को नमक छोड़कर कुछ भी बाहर से नहीं मंगाना पड़ता था. कपड़ों, जूतों से लेकर खेती के औजारों व फल-सब्जियों, तेल तक की आपूर्ति गांव से ही हो जाती थी. लेकिन आज गांवों में दूध और सब्जियां भी शहर से मंगाये जाने की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि गांवों का शहर पर निर्भर हो जाना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए घातक है. उन्होंने किसानों के खेती छोड़ते जाने पर दुख जताते हुए इस ओर जल्द ध्यान दिये जाने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि उत्पादकता बढ़ाने एवं कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने की व्यवस्था किये जाने की जरूरत बताई, ताकि अर्थव्यवस्था में किसानों की भागीदारी भी बढ़े. उन्होंने किसानों की आमदनी बढ़ाये बिना कुछ नहीं हो सकता. उन्होंने पूर्व में किसानों के बल पर देश में हुई हरित एवं श्वेत क्रांतियों की चर्चा करते हुए किसानों की बेहतरी के लिए एक और क्रांति की जरूरत बताई ताकि किसानों की स्थिति में सुधार हो सके. (नीचे भी पढ़ें)

समारोह के मुख्य वक्ता, मुंबई से पधारे कृषि अर्थशास्त्री डॉ केजेएस सत्यसाईं ने अपने संबोधन में सीमांत किसानों पर विशेष चर्चा की. उन्होंने झारखंड में किसानों की आमदनी घटने की चर्चा करते हुए इसे चिंता जनक बताया. उन्होंने कहा कि समाज के लिए अन्न का उत्पादन अत्यावश्यक है, किन्तु इसके लिए किसानों के शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक उन्नति का ध्यान रखा जाना जरूरी है. उनका मानना था कि आर्थिक विकास कृषि उत्पादन के विकास के बिना संभव ही नहीं, क्योंकि मनुष्य सोना नहीं खा सकता, उसे खाने के लिए अनाज ही चाहिए.(नीचे भी पढ़ें)
सेमिनार के सह आयोजक नबार्ड के महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कृषि एवं ग्रामीण विकास में नबार्ड की भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने स्वयं सहायता समूहों व किसान क्रेडिट कार्ड का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि नाबार्ड अपने संसाधनों से राज्य सरकारों का सहयोग करता है ताकि किसानों की स्थिति सुधारी जा सके. उन्होंने नबार्ड का सूत्र वाक्य ‘गांव बढ़े तो देश बढ़े’ को दुहराते हुए जलवायु परिवर्तन के कारण सामने आ रही नयी समस्याओं का हल निकाला जाना जरूरी होगा.(नीचे भी पढ़ें)
कोल्हन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ गंगाधर पंडा ने अपने संबोधन में राज्यपाल रमेश बैस के कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रति विशेष स्नेह के लिए आभार जताते हुए नये साल में उनका पहला कार्यक्रम कोल्हान विश्वविद्यालय में होने पर खुशी भी जतायी. उन्होंने कहा कि धरती हमारी माता है और हम उसके पुत्र. हमारी कृषि इसी धरती की कोख से जुड़ी है. कृषि की उन्नति को ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का आधार बताते हुए उन्होंने जिसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय कार्य करने के लिए नबार्ड की प्रशंसा भी की. (नीचे भी पढ़ें)
सेमिनार में अन्य महत्वपूर्ण लोगों के साथ ही कोल्हान विवि की प्रति कुलपति डॉ कामिनी कुमार, जमशेदपुर महिला विवि की कुलपति डॉ अंजिला गुप्ता, जमशेदपुर की उपायुक्त विजया जाधव भी उपस्थित रहे. करीमसिटी कॉलेज के प्राचार्य डॉ मोहम्मद रेयाज ने आरंभ में अतिथियों का स्वागत किया, जबकि उद्घाटन समारोह का संचालन डॉक्टर नेहा तिवारी ने किया. अंत में डॉ जी विजयलक्ष्मी ने धन्यवाद ज्ञापन किया.











