जमशेदपुर : जमशेदपुर के कदमा शास्त्रीनगर स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में प्रशासनिक(कार्यालय) भवन का उद्घाटन राज्यसभा सांसद और आरएसएस के नेता राकेश सिन्हा ने किया. इस भवन का निर्माण सांसद की निधि से हुआ है. इस अवसर पर अभय कुमार सामंत, वी नटराजन, श्याम किशोर प्रसाद सिन्हा, अरुण सिंह तथा प्रबंध समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे. सर्वप्रथम राज्यसभा सांसद ने विद्यालय परिसर में अवस्थित शास्त्री जी की प्रतिमा पर पुषांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. (नीचे भी पढ़ें)

उसके बाद भवन का विधिवत उद्घाटन किया गया. विद्यालय की बहनों द्वारा स्वस्तिवाचन किया गया. सांसद का स्वागत विद्यालय के घोष के भैया बहनों ने घोष वादन के साथ किया. भवन उद्घाटन के बाद भवन निरीक्षण तत्पश्चात मां सरस्वती, ओम एवं भारत माता की प्रतिमा के समक्ष सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित एवं पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का विधिवत श्रीगणेश किया गया. अतिथियों का परिचय विद्यालय के प्रधानाचार्य विजय शंकर सिंह द्वारा किया गया. सभी अतिथियों को अंग वस्त्र एवं श्रीफल से सम्मानित किया गया. सरस्वती शिशु विद्या मंदिर शास्त्रीनगर की प्रारंभ से अब तक की विकास गाथा का वृत्त सचिव महोदय द्वारा प्रस्तुत किया गया. हमारे अभिभावक संघ के विभाग संघचालक अभय सामंत द्वारा आशीर्वचन के उपरांत मुख्य अतिथि का उद्बोधन हुआ. उन्होंने शिक्षा को सबसे बड़ा धर्म माना. मुख्य अतिथि ने कहा कि बच्चे कोरी स्लेट की तरह होते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
उस पर जो लिख दिया जाए वह अमिट हो जाता है. अभिभावक एवं शिक्षक की भूमिका अहम होती है. माता पिता बच्चों को जन्म देते हैं लेकिन शिक्षक उस बालक को अच्छी शिक्षा एवं अच्छा संस्कार देकर देश का एक अच्छे नागरिक के रूप में निर्माण करता है. उन्होंने इसके लिए कई उदाहरण प्रस्तुत किए. विद्यालय के अध्यक्ष महोदय द्वारा आगत अतिथियों का धन्यवाद एवं आभार प्रकट किया गया. कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की दीदी श्वेता मेहता ने किया.अंत में शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ. कार्यक्रम समापन के बाद राज्यसभा सांसद ने विद्यालय में स्थापित शिशु वाटिका, साइंस लैब एवं अटल टिंकरिंग लैब एवं कंप्यूटर लैब का निरीक्षण किया गया. सांसद ने विद्यालय के आचार्य कर्मचारियों की प्रशंसा की. उन्होंने सबको धन्यवाद देते हुए कहा कि विद्यालय का विकास आप लोगों के कंधों पर है और आप ही इसे उत्कृष्ट बना सकते हैं.











