गालूडीह: विगत दो वर्षों से एनएचआई द्वारा हम लोगों को जबरन परेशान किया जा रहा है. पहला तो पांचवीं शेड्यूल एरिया में बिना ग्रामसभा के अपने मर्जी से अधिग्रहण की घोषणा करना लोक हित में कार्य ना करके उक्त स्थान को व्यवसायिक प्रयोग में लगाकर अपना आमदनी बढ़ाना चाहता है. एनएचआई जिसका जीता जागता उदाहरण हम लोगों के गांव में किया गया. अमृत सरोवर योजना की आड़ में बत्तख और मछली पालन करने के लिए भाड़े में तालाब उपलब्ध कराने और धालभूमगढ़ में एनएचआई की जमीन पर किसी निजी व्यक्ति को पेट्रोल पंप भाड़े पर देना है. अब जबरन हम लोगों की जमीन को जिसका हम लोगों ने मुआवजा तक नहीं लिया है. उसको एनएचआई का जमीन कहना जो कि सरासर गलत है. इससे लगता है कि झारखंड में हम आदिवासियों के साथ एनएचएआई शोषण कर रहा है. जिसका वक्त आने पर मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा. हम लोगों ने शुरू से आज तक लिखित के माध्यम से हर चीज को जिले के बड़े से बड़े अधिकारी को अवगत करा कर रखा है. हम लोगों का मुआवजा कम होने के कारण हम लोगों ने आर्बिट्रेशन में अपना पक्ष रखा था. उसको भी एनएचआई द्वारा ठुकरा दिया गया. (नीचे भी पढ़े)

आर्बिट्रेशन का फैसला आने के बाद हम लोगों ने इसका शिकायत झारखंड सरकार तथा हमारे विधायक रामदास सोरेन को भी अवगत कराया हुआ है. जिसमें उनका हस्तक्षेप हो चुका है. हमारे विधायक रामदास सोरेन हमारे साथ शुरू से ही समर्थन में है. सारे विषय वस्तु को जानते भी हैं. इसके साथ साथ हम लोगों ने झारखंड पंचायती राज समिति के अध्यक्ष को भी इस विषय पर लिखित में आवेदन दिया है. जिसका भी जवाब अभी तक आना बाकी है. पिछले 2 वर्षों से एनएचआई के कारण हम लोगों ने उक्त जमीन में ना कृषि ना ही जीविका चलाने के लिए कोई साधन किया था. लेकिन पिछले 6 महीनों से हम लोगों ने अपनी जीविकोपार्जन चलाने के लिए अपना अपना जगह पर काम कर रहा है. इसके बावजूद अगर एनएचएआई हम पर दबाव डालता है और अगर हमारा पेट पर लात मारता है तो आने वाले दिन में हो सकता है. हमारे सारे रैयत द्वारा टोल प्लाजा को बंद कर दिया जाएगा. एनएचएआई अपना गुंडागर्दी जल्द से जल्द बंद कर दे वरना इसका परिणाम इतिहास के पन्नों में लिखा जाएगा. इसी माध्यम से हम लोग जिला प्रशासन को भी अवगत कराना चाहते हैं कि हमारे साथ गलत ना हो वरना जो भी होगा उसका दोषी जिला प्रशासन ही होगा.




