
जमशेदपुर : टाटा वर्कर्स यूनियन में मजदूरों की गाढ़ी कमायी का दुरुपयोग किया जा रहा है. गुरुवार को यूनियन की फाइनांस कमेटी की हुई बैठक में इस पर फैसला लिया गया. इस बैठक में कई मुद्दों पर गंभीर चिंता जतायी गयी. खास तौर पर टाटा वर्कर्स यूनियन में मजदूरों की गाढ़ी कमायी से जमा हुए पैसे का दुरुपयोग करने का मामला उजागर हुआ, जिस पर कड़ी आपत्ति जतायी गयी. फाइनांस कमेटी की बैठक के दौरान यूनियन की जमा राशि 36 करोड़ 90 लाख रुपये मार्च माह तक दिखाया गया, जो जून 2019 तक घटकर 36 करोड़ 70 लाख के आसपास हो गया, यानी करीब 20 लाख रुपये यूनियन ने खर्च कर दिये जबकि ब्याज से ही यूनियन का कारोबार चलने की स्थिति है. इस पर आपत्ति जतायी गयी कि खर्च को कम किया जाये. बैठक में मार्च, अप्रैल, मई और जून 2019 का ऑडिट रिपोर्ट रखा गया. इस दौरान चारों माह का ऑडिट रिपोर्ट का अध्ययन किया गया तो पाया गया कि सिर्फ चार माह में करीब 6 लाख 80 हजार रुपये टाटा स्टील को यूनियन के नाम पर आवंटित क्वार्टर का भाड़े के तौर पर टाटा वर्कर्स यूनियन की ओर से दिया गया है. अध्ययन करने पर पता चला कि यूनियन के पूर्व अध्यक्ष पीएन सिंह के आवास पर ही काफी खर्च कर दिया गया है. अध्यक्ष के पद से हटे हुए पांच साल से अधिक पीएन सिंह के हो चुके है, लेकिन आज तक यूनियन उनके क्वार्टर के खर्च का वहन कर रही है जबकि उनके पुत्र यूनियन के बारी मेंशन की कमेटी में भी है. इस पर आपत्ति जताया गया और तत्काल फाइनांस कमेटी के चेयरमैन सह टाटा वर्कर्स यूनियन के डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय की मंजूरी के बाद अध्यक्ष आर रवि प्रसाद ने पूर्व अध्यक्ष पीएन सिंह के आवास के लिए हो रहे खर्च को रोकने का आदेश जारी कर दिया. इसके बाद यह अध्ययन किया गया कि हाल के दिनों में जितने उपचुनाव हुए है यानी जितने भी कमेटी मेंबर रिटायर हुए है, उसके बदले किसी का चयन किया गया है, उस पर भी लाखों रुपये खर्च कर दिये गये है. चुनाव पदाधिकारी सह यूनियन के उपाध्यक्ष भगवान सिंह द्वारा सौंपे गये बिल के मुताबिक, सिर्फ गाड़ियों के इस्तेमाल पर करीब 80 हजार रुपये खर्च कर दिया गया है. चुनाव कराने के नाम पर यह 80 हजार रुपये खर्च सिर्फ गाड़ी पर दिखाया गया है, चुनाव पर होने वाले और खर्च अलग है, जिसका ब्योरा आना बाकि है. फाइनांस कमेटी ने इसमें भी कटौती का प्रस्ताव पारित किया. इसके अलावा यह भी तय किया गया कि यूनियन के सभी गाड़ियों की फिर से नीलामी की जायेगी. यूनियन के पास अभी दो होंडा सिटी कार और दो इंडिगो कार है, जिसकी नीलामी की जानी है. इस मीटिंग के दौरान एक साथ चार माह का ऑडिट रिपोर्ट रखने पर भी आपत्ति जतायी गयी और कहा गया कि हर दो माह में ऑडिट रिपोर्ट को रखा जाये. इस दौरान किसी ने कह दिया कि प्रोफेशनल लोग ही ऑडिट रिपोर्ट तैयार करता है, जिस पर जवाब दिया गया कि यह क्या बात हुई, टाटा वर्कर्स यूनियन भी प्रोफेशनल लोग से ही अपनी ऑडिट कराती है. इसके बाद यह तय हुआ कि हर दो माह में एकाउंट को पारित कराया जायेगा, जो संविधान भी कहता है.


