गालूडीह: गालूडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत जगन्नाथपुर चौक में मंगलवार को तिलका मांझी की 275वीं जयंती मनायी गयी. इस दौरान शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया और श्रद्धांजलि दी. मंत्री ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी तिलका मांझी का 11 फरवरी 1750 को एक संथाल परिवार में जन्म हुआ था. उन्होंने साल 1771 से 1784 तक अंग्रेजों से लंबी लड़ाई लड़ने का काम किया. उन्होंने किसानों को संगठित कर अंग्रेजों के खिलाफ पहला विद्रोह किया. (नीचे भी पढ़े)
मात्र 18 वर्ष की आयु में इस वनवासी युवक ने संथाल परगना क्षेत्र से अन्यायी ब्रिटिश सरकार की दमनकारी व्यवस्था का खुलकर विरोध किया. जब अंग्रेजी सरकार की दमनकारी प्रवृत्तियों और उसके जुल्म से आदिवासी परेशान हो गए, तब तिलका माझी ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ भागलपुर और संथालपरगना के पहाड़ी इलाकों में छिपकर अंग्रेजों से छापामार लड़ाइयां लड़ीं. (नीचे भी पढ़े)
उनके हमलों से परेशान होकर अंग्रेज अधिकारी क्लीवलैंड ब्रिटिश फौज लेकर उन्हें पकड़ने के लिए आया. 1785 में अंग्रेजों के साथ लड़ाई में गोली लगने से वह घायल हो गए. तब अंग्रेजों की सेना ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और घोड़े के पीछे बांध पूरे शहर में घसीटा. 13 जनवरी 1785 में पेड़ से लटका तिलका मांझी को फांसी दे दी गयी. मौके पर कालीपद गोराई, जगदीश भकत, वकील हेंब्रम, रतन महतो, काजल डॉन, मंटू महतो, बादल किस्कु, दुलाराम टुडू, फूलचांद टुडू, बिमल मार्डी, बबलू हुसैन आदि उपस्थित थे.




