रामगढ़ : दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पारंपरिक श्राद्ध कर्म का सोमवार को सातवां दिन है. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपने परिजनों संग दिवंगत आत्मा की शांति हेतु आज “सात कर्म” का पारंपरिक विधान पूरा किया. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन मर्माहत हृदय से न सिर्फ एक बेटे का कर्तव्य निभा रहे हैं बल्कि दिवंगत “गुरुजी” के यादों को समेटे हुए अपने पैतृक गांव नेमरा से ही राजकाज की जिम्मेवारी का भी निर्वहन भी पूरी तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ कर रहे हैं. दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए राज्य के विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में लोग नेमरा गांव में एकत्रित हुए. दूर-दराज से आए सभी लोगों ने गुरूजी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी. मौके पर लोगों ने मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से मिलकर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की. (नीचे भी पढ़ें)
मौके पर उपस्थित लोगों ने स्मृति -शेष दिशोम गुरु शिबू सोरेन के योगदान, उनके जीवन मूल्यों और उनके जनसेवा के कार्यों को याद किया. लोगों ने गुरूजी के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुजी का जीवन संघर्ष, त्याग और जनसेवा का अनमोल मिसाल रहा है. कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी वे अडिग रहे और कभी उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. जनसेवा के प्रति उनका अटूट समर्पण, संघर्ष और त्याग आने वाली पीढ़ियों के द्वारा हमेशा याद रखा जाएगा. श्रद्धा सुमन अर्पित करने वाले लोगों में मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री, विधायक, गणमान्य व्यक्ति सहित बड़ी संख्या में आम लोग शामिल रहे.











