जमशेदपुर : झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी के उस फैसले को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है, जिसमें रिम्स और एमजीएम समेत राज्य के प्रमुख सरकारी अस्पतालों से होमगार्ड जवानों को हटाकर उनकी जगह पूर्व सैनिकों की तैनाती करने की बात कही गई है. इस निर्णय के विरोध में रविवार को झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले सैकड़ों होमगार्ड जवानों ने जमशेदपुर के साकची स्थित आमबगान मैदान में जोरदार प्रदर्शन किया. इस दौरान जवानों ने सरकार और स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की. (नीचे भी पढ़ें)

विरोध सभा को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव राजीव कुमार तिवारी ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी का यह फरमान पूरी तरह तुगलकी और अन्यायपूर्ण है. इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि होमगार्ड जवानों की सेवा और तैनाती को लेकर सरकार के साथ पहले ही विधिवत समझौता हो चुका है. इसके बावजूद वर्षों से निष्ठापूर्वक अपनी जिम्मेदारी निभा रहे जवानों को अचानक हटाने की बात करना उनके साथ विश्वासघात है. राजीव तिवारी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया तो पूरे झारखंड में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा. संगठन जवानों के अधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए सड़क से लेकर अदालत तक संघर्ष करेगा. जरूरत पड़ने पर सरकार के आदेश के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की जाएगी. (नीचे भी पढ़ें)

प्रदर्शन में शामिल जवानों ने कहा कि कोरोना महामारी के कठिन दौर से लेकर आज तक होमगार्ड जवानों ने सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने पूरी निष्ठा से ड्यूटी की. ऐसे में उन्हें हटाकर पूर्व सैनिकों की नियुक्ति करने की योजना उनके रोजगार पर सीधा हमला है. जवानों ने सरकार से मांग की कि उनके वर्षों के अनुभव और सेवा को देखते हुए उन्हें अस्पतालों में कार्यरत रहने दिया जाए. प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांग पूरी नहीं होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.












