
जमशेदपुर : वर्षों से बंद जमशेदपुर की गोलमुरी स्थित इंकैब इंडस्ट्रीज (केबुल कंपनी) को खोलने को लेकर पहल शुरू की गयी है. इसको लेकर मंगलवार को कोलकाता स्थित एनसीएलटी में इन्कैब कर्मचारियों द्वारा दाखिल एक आवेदन पर सुनवाई हुई. कर्मचारियों के तरफ से उनके अधिवक्ताओं ने एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी को बताया कि परिसमापक (लिक्वीडेटर) ने एक ओर मनमाने ढंग से इन्कैब के कर्मचारियों के वेतन बकाये संबंधी कानूनी दावों को गैरवाजिब तरीके से निरस्त किया है और दूसरी ओर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा अपने 6 जनवरी 2016 के आदेश में बैंकों का बकाया 21.63 करोड़ रुपये तय करने के बावजूद, परिसमापक ने कमला मिल्स, फस्का इन्वेस्टमेंट और पेगाशस असेट रीकंस्ट्रक्शन के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा कर उक्त देनदारी को अविश्वसनीय ढंग से बढ़ा कर 2338.84 करोड़ रुपये कर दिया है. कर्मचारियों के अधिवक्ताओं ने एनसीएलटी को यह भी बताया कि एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने अपने 7 दिसंबर 2020 के आदेश के पैरा 72 के द्वारा परिसमापक को कमला मिल्स और उसके निदेशक रमेश घमंडीराम गोवानी द्वारा इन्कैब कंपनी के खिलाफ किये गये बड़े फर्जीवाड़े और 100 करोड़ से अधिक के गबन की जांच करने के लिए कहा था पर परिसमापक ने दुर्भावनाजनित कारणों से कोई जांच नहीं की. अधिवक्ताओं को सुनने के उपरांत जज राजशेखर और श्री सूरी की बेंच ने परिसमापक के अधिवक्ताओं को सुना और समय की पाबंदी की वजह से एप्लीकेशन को 5 जनवरी 2021 तक के लिए स्थगन किया. इन्कैब कर्मचारियों की तरफ से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव और आकाश शर्मा ने जिरह की. परिसमापक की तरफ से जॉय शाह और शशि अग्रवाल ने जिरह की.





