न्यूयॉर्क : टेक दिग्गज और माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने एआइ (AI) को लेकर बहुत बड़ी बात कह दी है. उनका कहना है कि अगर ये तकनीक गलत हाथों में गई, तो 100 करोड़ लोग अपनी जान से हाथ धो बैठेंगे. उनका कहना है कि इतिहास में कभी एआइ जैसा एडवांस टूल मौजूद नहीं रहा और गलत हाथों में जाकर यह घातक हथियार बन सकता है. बिल गेट्स की मांग है कि इसे लेकर सरकार को कानून बनाना चाहिए. गौर करने वाली बात है कि यह चेतावनी उस समय सुनने को मिली है, जब एआइ के आपे से बाहर होकर दूसरी वेबसाइट्स को निशाना बनाने और मिसाइल सॉफ्टवेयर तक में एआइ के इस्तेमाल की कोशिशों ने दुनिया भर में हलचल मचा रखी है. (नीचे भी पढ़ें)
एनबीसी न्यूज के एक कार्यक्रम में दिए एक इंटरव्यू में बिल गेट्स ने कहा कि एआइ बेहद शक्तिशाली है और गलत मंशा रखने वाले लोग इसके जरिए भारी तबाही मचा सकते हैं. इस इंटरव्यू में गेट्स यह भी कहने से नहीं झिझके कि एआइ 100 करोड़ मौतों की वजह बन सकता है. हालांकि उन्होंने साफ किया कि इससे पूरी मानवता का सफाया नहीं हो सकता. उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को इसे लेकर कानून बनाने चाहिए. रिपोर्ट्स के मुताबिक बिल गेट्स की चेतावनी तब सामने आई जब ओपन एआइ और एंथ्रोपिक जैसी एआइ कंपनियों के एआइ एजेंट्स काबू से बाहर जा रहे हैं. हाल ही में ओपन एआइ के एआइ एजेंट्स ने ऑस्ट्रेलिया की पब्लिक हेल्थ सर्विस वेबसाइट को हैक कर लिया था और कंपनी महीनों इस बात की जानकारी वहां की सरकार को नहीं दे सकी. इसके बाद ओपन एआइ के एआइ एजेंट्स ने खुद अमेरिकी सरकार की वेबसाइट्स पर भी हमला बोला और उनमें से जानकारी निकाल कर पब्लिक कर दी. (नीचे भी पढ़ें)
इसी तरह एंथ्रोपिक भी यह बता चुका है कि यमन के चरमपंथियों ने बैलिस्टिक मिसाइलों के मार्गदर्शन, नियंत्रण और नेविगेशन सॉफ्टवेयर बनाने के लिए उनके क्लॉड एआइ को इस्तेमाल करने की कोशिश की थी. अपने इंटरव्यू में बिल गेट्स ने इस बात पर जोर दिया है कि वाशिंगटन को एआइ पर नजर रखने के लिए कड़े कानून बनाने चाहिएं. उनका कहना है कि अब कंपनियों को सेल्फ-रेगुलेशन के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. उन्होंने माना कि कड़े नियमों से इंडस्ट्री पर थोड़ा बोझ बढ़ेगा लेकिन इससे एआइ के विकास की रफ्तार धीमी नहीं होगी. (नीचे भी पढ़ें)
भले बिल गेट्स ने एआइ को लेकर कानून बनाने की बात कही हो और खुद ओपन एआइ के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों की वकालत की है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसके खिलाफ हैं. हाल ही में इसे लेकर ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक भी हुई थी, लेकिन उसमें भी इस तकनीक को नियंत्रित करने को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी. ऐसे में कहा नहीं जा सकता कि अमेरिकी सरकार इसे लेकर कोई नियम बनाएगी या नहीं.







