
जमशेदपुर: तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सेमिनार के तीसरे दिन की शुरुआत अंकशास्त्र एवं रेमेडियल एस्ट्रोलॉजी विषयक सत्र से हुई सत्र को संबोधित करते हुए डॉ सुरेश झा, डॉ नरेंद्र कुमार (रांची), एचडीएफसी बैंक रांची की पदाधिकारी श्रीमती निधि एवं प्रो एसके शास्त्री ने कहा कि ज्योतिषीय उपाय डर या अंधविश्वास पर आधारित नहीं होते, बल्कि जीवन की समस्याओं एवं शुभ कार्यों में आ रही बाधाओं के निराकरण का माध्यम होते हैं. उन्होंने बताया कि किसी जातक को कब, किससे और किस प्रकार का उपाय मिलेगा, यह उसकी कुंडली में निर्धारित होता है, इसलिए उपाय हेतु योग्य एवं अनुभवी ज्योतिषी से ही परामर्श लेना चाहिए. इसके बाद आयोजित वास्तु शास्त्र सत्र में शहर के वास्तुविद उज्ज्वल राय ने कहा कि वर्तमान समय में वास्तु के गलत प्रयोग के कारण घरों में पारिवारिक कलह बढ़ता जा रहा है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि सात घोड़ों अथवा दौड़ते घोड़ों की तस्वीरें ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि कई बार विवाद का कारण बन जाती हैं. (नीचे भी पढ़े)

ऐसे भ्रांत प्रयोगों से बचना आवश्यक है. वास्तु सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. एसके शास्त्री ने वर्तमान समय में एस्ट्रो-वास्तु की उपयोगिता पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि यदि गृहस्वामी की कुंडली के अनुरूप घर अथवा फ्लैट का निर्माण किया जाए तथा परिवार के सदस्यों की कुंडली के अनुसार उनके रहने वाले कमरों का निर्धारण और इंटीरियर को वास्तु-सम्मत रखा जाए, तो इसके अत्यंत सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं. ऐसे संतुलित एस्ट्रो-वास्तु प्रयोग से पारिवारिक सुख, मानसिक शांति एवं जीवन की स्थिरता में वृद्धि होती है. समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं बिहार सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. आलोक रंजन ने कहा कि आज मनुष्य तकनीक से तो जुड़ा है, लेकिन मानसिक रूप से अकेला और भ्रमित होता जा रहा है. ऐसे समय में ज्योतिष की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि ज्योतिष केवल भविष्य बताने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति को जीवन की दिशा समझाने का शास्त्र है.उन्होंने कहा कि सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में यह स्पष्ट हुआ कि ज्योतिष भय नहीं, समाधान देता है और अंधविश्वास नहीं, बल्कि आत्मबोध उत्पन्न करता है. (नीचे भी पढ़े)

सत्र के दौरान सर्वश्रेष्ठ व्याख्यान के लिए पद्मा झा, प्रेरणा निधि एवं दिव्येन्दु त्रिपाठी को सम्मानित किया गया. सत्र के समापन अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के कर-कमलों द्वारा श्रीलंका से पधारे ज्योतिषाचार्य जेजे कुलेश्री को ज्योतिष के सर्वोच्च सम्मान “कासार रत्न” से अलंकृत किया गया. इस अवसर पर संस्था द्वारा डॉक्टरेट उपाधि से कुल पांच शोधार्थियों को सम्मानित किया गया. साथ ही कासार संस्थान से उत्तीर्ण 17 विद्यार्थियों को विभिन्न विधाओं में अर्जित दक्षता के लिए प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए. इतिहास में पहली बार आध्यात्मिक ज्योतिष के व्यावसायिक पाठ्यक्रम में सफल रही तीन विदुषियों यथा विजेता कुमारी, जयश्री एवं सावित्री उपाध्याय को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया, जो इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई.तीन दिवसीय कार्यक्रम के सफल संचालन में जेवी मुरली कृष्णा, नीलम झा, विचित्र बेड़ा, धनराज, अविजित चक्रवर्ती, उषा सोनकर, आयुष कुमार, डॉ. संजीव झा, पद्मा झा एवं मीता सिंह का सराहनीय योगदान रहा.








