
जमशेदपुरः सीएसआईआर-नेशनल मेटलर्जिकल लेबोरेटरी (एनएमएल),का तीन दिवसीय संगोष्ठी संपन्न. इस दौरान इंडियन स्ट्रक्चर लइंटीग्रिटी सोसाइटी (इनएसआईएस), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (आईआईएम) जमशेदपुर चौप्टर और एनएमएल द्वारा संयुक्त रूप से ‘‘फटीग फ्रैक्चर इंटीग्रीटी पर आकलन‘‘किया गया . यह तीन दिवसीय संगोष्ठियों की श्रृंखला में 8 वांथा, जिसे वर्ष 2021 में सीएसआईआर-एनएमएल, जमशेदपुर द्वारा शुरू किया गया था. इसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी विदों, शोधकर्ताओं और छात्रों का एक समुदाय बनाना था, जो लगातार इंजीनियरिंग सामग्री और घटकों की फटीग फ्रैक्चर इंटीग्रीटी के अनुसंधान और अध्ययन में लगे हुए हैं. सामग्री की थकान और फ्रैक्चर व्यवहार के विभिन्न पहलुओं पर वार्ता देने के लिए देश और विदेश के प्रमुख विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गए. (नीचे भी पढ़ें)
संगोष्ठी का उद्देश्य बिजली, रक्षा, एयरोस्पेस, मोटरवाहन, तेल और प्राकृतिक गैस और प्रक्रिया उद्योग जैसे विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले पेशेवरों के बीच बातचीत और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक सामान्य मंच प्रदान करना था. इस तीन दिवसीय आयोजन के विचार-विमर्श ने अकादमिक, अनुसंधान प्रयोगशालाओं और उद्योगों के बीच अकादमिक बातचीत का अवसर प्रदान किया, जो इंजीनियरिंग सामग्री और घटकों के विकास में लगे हुए हैं. संगोष्ठी के दायरे में शामिल इंजीनियरिंग सामग्री की विफलता के विभिन्न पहलू थे, जैसे थकान दरार वृद्धि और फ्रैक्चर क्रूरता, सामग्री और संरचनाओं का सेवा जीवन मूल्यांकन, विफलताओं का मूलकारण विश्लेषण, रेंगना दरार वृद्धि, विरूपण तंत्र और सूक्ष्म तंत्र इत्यादि. व्याख्यान कई तकनी की सत्रों में दिए गए, जिनकी अध्यक्षता देश के प्रमुख प्रौद्योगिकी विदोंने की। सत्र में आईओसीएल, टाटास्टील, एनटीपीसी, बीआईएसएस, प्राज इंडस्ट्रीज लिमिटेड और आईआईटी मद्रास, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी रुड़की, एनआईटी दुर्गापुर और आईआईईएसटी शिबपुर जैसे संस्थानों द्वारा नामित साठ पंजीकृत प्रतिनिधियों ने भाग लिया. संगोष्ठी का समापन शुक्रवार को इंजीनियरिंग सामग्री की विफलता के अध्ययन में लगे विशेषज्ञों के विचारों के आदान-प्रदान के लिए वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर पैनल चर्चा का आयोजन किया गया था. संगोष्ठी के प्रख्यात पैनलिस्ट में-
-डॉ इंद्रनील चट्टोराज, निदेशक, सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातु कर्म प्रयोगशाला, जमशेदपुर (अध्यक्ष)
-डॉ. विकास कुमार सक्सेना, पूर्व निदेशक, डीएमआरएल, हैदराबाद
-डॉ. एन. ईश्वरप्रसाद, डीआरडीओ-डीएमएसआरडीई, कानपुर
-प्रो. रघुवी. प्रकाश, भारतीय प्रौद्योगि की संस्थान, मद्रास
-डॉ. जयंत चट्टोपाध्याय, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई
-डॉ सौमित्रतारफदर, सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातु कर्म प्रयोगशाला, जमशेदपुर
-डॉ. सुबीर भौमिक, सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज, बेंगलुरु
-प्रो. के. के. रे, पूर्व भारतीय प्रौद्योगि की संस्थान, खड़गपुर
-डॉ. के. भानुशंकर राव, हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद
-डॉ बीकेदत्ता, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई (नीचे भी पढ़ें)
पैनल के सदस्यों द्वारा संरचनात्मक अखंडता मूल्यांकन और इसके भविष्य पर व्यापक चर्चा के साथ यह एक बहुत ही मूल्यवान और सफल सत्र था. सत्र के अंत में देश में उपलब्ध विशेषज्ञता को एकीकृत करके एक साझा मंच बनाने और संरचनात्मक अखंडता विश्लेषण से संरचनात्मक स्वास्थ्य निगरानी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए डॉ एस तारफदर का एक प्रस्ताव था, जिसे पैनलिस्टों द्वारा अच्छी तरह से सराहना की गई थी. इस विषय पर एक राष्ट्रीय स्तर का डेटा बेस तैयार करने का भी प्रस्ताव किया गया था और अच्छी तरह से स्वीकार किया गया था. जिससे सामग्री की विफलता के अध्ययन में लगे छात्रों को लाभ होगा. आभासी कार्यक्रम में लगभग 60 पेशेवरों ने भाग लिया. सीएसआईआर-एनएमएलके वैज्ञानिक चंद्रवीर सिंह द्वारा प्रस्तावित धन्यवाद प्रस्ताव के साथ सत्र का समापन हुआ.












