गालूडीह : गालूडीह के उल्दा में विगत एक हफ्ते से चल रही शिव पुराण कथा ने शुक्रवार को विराम ले लिया. कथा के अंतिम दिन प्रवचन कर्ता स्वामी हृदयानंद गिरि ने श्रद्धालुओं को 12 ज्योर्तिलिंगों की कथा सुनाई. उन्होंने बताया कि शिव साक्षात रूप में एक दिव्य ज्योति के रूप में प्रकट हुए थे, जो धरती के 12 अलग-अलग स्थानों पर अपने विभिन्न रूपों में साक्षात विराजमान हुए. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने कहा कि एक बार भगवान ब्रह्मा एवं भगवान विष्णु के बीच बहस हो गई कि सर्वोच्च देवता कौन है. तभी भगवान शिव प्रकाश स्तंभ के रूप में प्रकट हुए और प्रत्येक से इस प्रकाश स्तम्भ का अंत खोजने को कहा. भगवान विष्णु ज्योतिर्लिंग का अंत खोजने के लिए ऊपर की ओर एवं भगवान ब्रह्मा नीचे की ओर चल पड़े. लेकिन दोनों में से किसी को ज्योतिर्लिंग का अंत नहीं मिला.(नीचे भी पढ़ें)

इसके बाद भगवान शिव ने प्रकाश स्तंभ को पृथ्वी पर गिरा दिया और आज उसे ही ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है. उन्होंने कहा कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है. 12 ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिण मुखी है जो अपने आप प्रकट हुआ था. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव की पूजा जलती हुई चिता की राख व भस्म से महाकाल शिव की पूजा की जाती है. कथा की पूर्णाहुति भगवान शिव की महा आरती के साथ हुई.(नीचे भी पढ़ें)

माता वैष्णो देवी धाम मंदिर के प्रथम स्थापना दिवस के अवसर पर शुक्रवार को सात दिवसीय आयोजन का समापन महा भंडारे के साथ हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भोग ग्रहण किया. महाभोग ग्रहण करने के लिए देर तक लंबी कतार लगी रही. सुबह से हवन यज्ञ पूजन का आयोजन चलता रहा, जिसके बाद दोपहर 12 बजे से देर रात तक महा भंडारा चलता रहा. भंडारे के इस आयोजन में मंदिर समिति के सदस्यों ने अहम भूमिका निभाई. वहीं, कई गणमान्य लोगों ने भी भंडारे में अपना सहयोग कर भंडारे की व्यवस्था संभाली.




