रांची: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के सफल 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने राहे प्रखंड के फुलवार गांव पहुंचकर प्रख्यात साहित्यकार डॉ. करम चंद्र अहीर के घर पहुंचे. यहां उन्होंने भाषा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. अहीर को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया.कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद संजय सेठ ने कहा कि लेखक और साहित्यकार समाज के आदर्श होते हैं. उन्होंने कहा, “पांच परगना में भाषाई जागृति की जो ज्योति डॉ. करम चंद्र अहीर ने जलाई है, उसे इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा. डॉ. अहीर ने पंचपरगनिया भाषा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है. उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी.डॉ. करम चंद्र अहीर ने वर्ष 1980 से पंचपरगनिया भाषा के विकास के लिए काम शुरू किया. 1982 में उन्होंने “पंचपरगनिया भाषा विकास समिति”का गठन किया. समिति के सक्रिय सदस्यों के सहयोग से इस भाषा को रांची विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल कराया गया.(नीचे भी पढ़े)

पंचपरगनिया के साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनके प्रमुख सहयोगी रहे, परमानंद महतो, राजकिशोर सिंह, गोरेंद्र नाथ गोंझू, भूतनाथ प्रमाणिक, शक्तिधर अधिकारी, बुटन देवी, सोमवारी देवी, ज्योति लाल महादानी, आशुतोष कोइरी आदि. इन्होंने पंचपरगनिया भाषा के लिए झाड़ लिपि का भी आविष्कार किया. वर्ष 2008 में उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए उन्हें “राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार” से सम्मानित किया जा चुका है. पंचपरगनिया भाषा का इतिहास, आदर्श पंचपरगनिया व्याकरण और पंचपरगनिया भाषा का व्याकरणिक अध्ययन अहीर के द्वारा लिखी गयी है. वयस्क शिक्षा परियोजना पदाधिकारी के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने ताम्बाजुड़ी (घाटशिला) और तिरुलडीह (पोटका) को पूर्ण साक्षर गांव घोषित कराया.प्रकृति प्रेमी डॉ. अहीर ने 5 एकड़ बंजर भूमि पर औषधीय, फलदार और इमारती वृक्ष लगाकर अपने क्षेत्र को हराभरा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.मौके पर रांची जिला ग्रामीण कांग्रेस के जिला अध्यक्ष धीरज महतो विनय, दिलेश्वर कोइरी, खगेश महतो, मेघनाथ महतो, गंगाधर साव, उमेश महतो, नागेश्वर महतो, दीपक कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.








