
रांची : झारखंड में कांग्रेस के विधायक इरफान अंसारी मुसलिम समुदाय के लोगों के लिए वरदान साबित हो रहे है और उनके रहनुमा के रुप में उभरे है. वे लगातार मुसलिम समुदाय के मुद्दे उठा रहे है, जिस कारण उनकी लोकप्रियता भी बढ़ रही है. वे जामताड़ा से विधायक है, लेकिन उन्होंने सरायकेला-खरसावां जिले में मारे गये तबरेज अंसारी की मौत के मामले को काफी महिनों के बाद उठाया. तबरेज अंसारी की विधवा शाइस्ता परवीन को लेकर वे विधानसभा पहुंचे. उनकी विधवा ने सरकार से न्याय की मांग की और कहा कि उनके पति की शादी के 54 दिनों के बाद ही भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था. अब तक उनको न्याय नहीं मिला है. कोर्ट का केस लड़ने तक के पैसे नहीं है और उनको मुआवजा या नौकरी देने का सिर्फ आश्वासन दिया गया, लेकिन उनको कुछ नहीं मिला है. तबरेज अंसारी की विधवा को लाने के पीछे के कारणों को पूछे जाने पर इरफान अंसारी ने कहा कि उन्होंने चुनाव से पहले ही यह वादा किया था कि तबरेज अंसारी की विधवा को जरूर सरकार न्याय देगी, जिस कारण उनको लाया गया. उन्होंने बताया कि तबरेज अंसारी की विधवा आत्महत्या करने जा रही थी क्योंकि वह तंगहाली में जी रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी तबपरेज अंसारी की पत्नी की मुलाकात करायी है. इस मामले का विरोध भाजपा के विधायक रंधीर सिंह ने किया और कहा कि सरकार बेवजह जनता के बीच बने रहने का हथकंडा अपना रही है. इस पूरे मामले की सरकार के स्तर पर जांच करा ली जाये, जो सही होगा, वह सामने आ जायेगा. लेकिन इसको राजनीतिक मुद्दा बनाना गलत है. आपको बता दें कि 17 जून 2019 की रात सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां थानांतर्गत धातकीडीह गांव में चोरी करने के आरोप में भीड़ ने तबरेज अंसारी को पीट दिया था, जिसकी 18 जून को पुलिस अभिरक्षा में ही चल रहे इलाज के दौरान ही मौत हो गयी थी. यह मामला देश के स्तर पर उठा था और इस मामले को लेकर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जवाब देना पड़ा था. लेकिन अब तक इस मामले में विधवां को किसी तरह का कोई लाभ नहीं मिल पाया है.














