रांची: रांची के पूर्व सांसद रामटहल चौधरी ने बीते दिन झारखंड के जदयू प्रभारी अशोक चौधरी की मुलाकात हुई.इसके कई मायने निकाले जा रहे है. पहली संभावना यह है कि वे जदयू में शामिल हो सकते है.बिहार में भाजपा और जदयू गठबंधन टूटने के बाद जदयू का रुख झारखंड में भाजपा के वोट बैंक में सेंघ लगाना है. चुंकि झारखंड में भी कुरमी वोटों की अच्छी खासी संख्या है. जिसके आधार पर जमशेदपुर, हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद, खूंटी और रांची का लोक सभा चुनाव जीता जाता है. जदयू के प्रभारी अशोक चौधरी के पूर्व सांसद रामटहल चौधरी को पाले में करने के प्रयास में है. भाजपा भी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जमशेदपुर के सांसद विद्युतवरण महतो व गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है ताकि कुड़मी- महतो वोट पर एकाधिकार बना रहे. झारखंड में 14 लोकसभा सीटों में से कम से कम 6 सीटों पर कुड़मी वोटर निर्णायक रोल में रहते हैं. छोटानागपुर में वे असरदार हैं. राजनीतिक और आर्थिक रूप से संपन्न माने जाने वाले कुड़मी-महतो जाति के समर्थन से ही रांची, हजारीबाग, खूंटी, धनबाद, गिरिडीह, जमशेदपुर सीट पर किसी के लिए रिजल्ट तय होता है. साथ ही राज्य की 30 विधानसभा सीटों पर भी कुड़मी वोटर जबर्दस्त ताकत रखते हैं. झारखंड प्रदेश प्रभारी अशोक चौधरी का मानना है कि राज्य के जनजाति समाज में कुड़मियों को भी शामिल किया जाना चाहिए, अगर आदिवासी समाज इस पर आपत्ति करता है तो यह नाजायज है.(नीचे भी पढ़े)
विदित हो कि बिहार की राजनीति में कुड़मी समाज भले ही आबादी मे कम हो पर राजनीति में अहम ताकत है. सीएम नीतीश कुमार लंबे समय से कुड़मी राजनीति का सिरमौर बने हुए है. सीएम नीतीश कुमार लंबे समय से कुड़मी राजनीति का सिरमौर बने हुए हैं. माना जा रहा है कि खीरू महतो को राज्यसभा भेजने और झारखंड की बागडोर थमाने के पीछे भी नजर कुड़मी वोटरों पर नीतीश की है. रामटहल चौधरी को साथ लाकर दूसरा पिलर तैयार करने की तैयारी है. भाजपा, आजसू पार्टी, झामुमो, कांग्रेस भी झारखंड में कुड़मी समाज के लिए लुभावनी राजनीति करते दिखते हैं. भाजपा के लिए राज्य में शहरी वोटरों के अलावा कुड़मी वोटर बेहद अहम रहे हैं. यही कारण भी है कि मोदी मंत्रिमंडल में संभावित विस्तार के लिए पार्टी एक कुड़मी नेता को जगह देने की राह तलाश रही है. उसकी सहयोगी रही आजसू पार्टी के लिए तो महतो, कुड़मी वोटर ही सबसे बड़े आधार रहे हैं. झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए महतो, कुड़मी, मुस्लिम वोट बैंक है. चाहे सरकार में रहें या विपक्ष में, इस वर्ग के नेताओं को महत्वपूर्ण पद देकर इन वर्गों का भरोसा साधते रहे हैं. अभी सरकार में जगरनाथ महतो, हफीजुल हसन अंसारी जैसे मंत्री हैं. कुड़मियों को ट्राइबल का दर्जा देने के मसले पर पार्टी प्रमुख और सांसद शिबू सोरेन सहमति जता चुके हैं. कुड़मी-महतो को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने का समर्थन करते कह चुके हैं कि वे संथालों की उपजाति हैं.












