रांची: झारखंड में राज्यसभा का चुनाव 18 जून होगा. इसके लिए सत्ता व विपक्ष अपनी अपनी तैयारियों में पूरी से जुट गया है. महागठबंधन के विधायकों की बीएनआर बैठक हुई. इस बैठक में मतदान की रणनीति व चुनावी तैयारियों पर चर्चा की गयी. इसके बाद गठबंधन के नेताओं ने एकजुटता दिखाते हुए जीत का दावा किया. विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि मतदान प्रक्रिया को लेकर विधायकों के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे, इसके लिए मॉक ड्रिल करायी गयी. उन्होंने कहा कि इस दौरान किसी भी विधायक का वोट अवैध नहीं हो, इसके बारे में जानकारी भी दी गयी. साथ ही पूरी तरह महागठबंधन के विधायक इसके लिए तैयार है. विधायक जयमंगल सिंह ने कहा कि विपक्ष अपने विधायकों को होटल में रखे हुए है. उन्होने दावा किया कि भाजपा को अपना प्रत्याशी नहीं मिला. आला कमान के कहने पर उद्योगपति निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन करना पड़ा. उन्होने कहा कि हम लोग पूरी तरह से आश्वस्त है कि दोनों सीट हम लोगो के पास होगा. विधायक कोंगाडी ने कहा कि सभी विधायक एक है और चुनाव परिणाम महागठबंधन के पक्ष में आएगा. पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि गठबंधन के सभी विधायक एकजुट है, जबकि भाजपा के अंदर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. सभी सहयोगी दल एकजुट होकर प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने का काम कर रहे है.(नीचे भी पढ़े)
दूसरी ओर एनडीए के विधायक रांची के रेडिशन ब्लू में ठहरे हुए है. एनडीए विधायकों ने भी अपनी रणनीति बना ली है. सबसे बड़ी चिंता लातेहार के भाजपा विधायक की है. वे बीमार है. पहले दिन की बैठक में 24 विधायकों में से सिर्फ 17 ही पहुंचे थे. इस पर प्रदेश अध्यक्ष ने विधायकों के नहीं आने के कारण के बारे में बताया. सभी ने पहले सूचित किया था. अभी तक का समीकरण से यह पता लगाया जा सकता है कि अंकगणित मामले में महागठबंधन भारी पड़ता नजर आ रहा है. डुमरी विधायक जयराम महतो किस ओर जाते है. कहना बड़ा ही मुश्किल लग रहा है. एनडीए के पास कुल 24 अंक है. जिसमे भाजपा का 21, शेष एक जदयू, एक लोजपा(आर) एक आजसू है. अगर मान लिया जाए कि डुमरी विधायक जयराम महतो का वोट परिमल नाथवानी को मिल जाता है तो 25 का आंकड़ा पहुंच जाएगा. बुधवार को भाजपा के सभी विधायक अपना अपना फोन बंद कर दिए है. विदित हो कि पहले ही कहा गया फिर भी प्रथम व द्वितीय वरीयता के लिए जरुरत का अंकगणित समीकरण बनता नजर नही आ रहा है. जबकि महागठबंधन की कोशिश होगी कि पहले प्रत्याशी के पक्ष में 30 मत व दूसरे प्रत्याशी के 26 मत मिले तो भी दोनों उम्मीदवारो्ं की जीत सुनिश्चित हो जाएगी. अंकगणित को कैसे मात देने की कोशिश हो रही है. राजनीति में कुछ भी संभव है. बस रात भर का खेल है. बाजी किसके पक्ष में जाती है, यह तो भविष्य ही बताएगा.







